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वो प्यार जो कभी मिला ही नहीं…

उम्मीद है उसके फिर से लौट आने की

जैसा कि प्यार की कहानी कही से न कही से शुरू तो होती है लेकिन कुछ कहानियां लोगों की साधारण तरीके से व कुछ थोड़ा अलग दुनिया से हटकर होती है यह कहानी कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है जो कि मैंने इस कहानी को महसूस किया है। मैं नीरज हूॅ और मेरे प्यार की कहानी की शुरूआत इस तरह हुई कि जिसका मुझे अंदाजा भी नहीं था। नीरज और मोंटी गांव से दूर एक शहर में रहते थे। मेरा बड़ा भाई(मोंटी) काफी लंबे समय से एक लड़की(अनिता) से बात करता था समय बीतता गया और कहानी आगे बढ़ती गई मेरा भाई जिस लड़की से बात करता था उसकी एक छोटी बहन(सरिता) भी थी वह मेरे बड़े भाई से बात करती और परिवार के बारे में जानकारी लेने लगी। फिर मोंटी कभी-कभी अनिता और सरिता से बात करने के लिए नीरज का फोन इस्तेमाल कर लिया करता था एक दिन अनिता की बहन सरिता ने मोंटी से कहा कि मुझे आपके छोटे भाई नीरज से बात करनी है मोंटी ने कहा वह ऐसा लड़का नहीं वह सिर्फ किताबों तक ही समित है इससे ज्यादा नहीं सरिता ने इस बात पर मोंटी से शर्त लगा ली मैं आपके भाई नीरज को प्रेम जाल में फसाकर रहूंगी। मोंटी का रोज का वहीं अनिता से बात करना कभी अपने फोन से तो कभी छोटे भाई नीरज के फोन से बात करता था एक दिन अचानक नीरज के फोन पर अनिता का फोन आया लेकिन नीरज को पता नहीं था कि कौन लड़की बात कर रही है जैसा ही नीरज ने फोन उठाकर हैला कहा उसने सिर्फ इतना पूछा कि आप मोंटी के छोटे भाई नीरज हो क्या? बस इतना पूछकर फोन काट दिया। फिर कुछ दिनों के बाद उसका शाम के समय नीरज के पास फोन आया उस समय नीरज एक ऑफिस में कार्य करता है लेकिन जब नीरज ने फोन उठाया तो सरिता बोल रही थी मैंने कहा कि मैं अभी ऑफिस में हूॅं रूम पर जाकर भाई से बात करा दूंगा लेकिन सरिता का तो कुछ और ही इरादा था उसने कहा, मुझे आपसे बात करनी है आपके भाई से नहीं, पहली बार जब मैं सरिता से बात कर रहा था तब मुझे घबराहट से हो रही थी। सरित नीरज के बारे में पूछने लगी कि आप क्या काम करते हो और क्या काम है आपका ऑफिस में, नीरज ने अपने बारे में सरिता को सबकुछ बता दिया और फोन काटते समय नीरज ने सरिता से यह भी पूछ लिया कि क्या यह आपका ही नंबर है। सरिता ने मुस्कराते हुए कहा क्यूं आपने फिर से बात करनी है क्या, नीरज ने कहा, नहीं, बस ऐसे ही मालूम कर रहा था नीरज ने उस दिन के कुछ दिनों बाद सरिता को एक मैसेज किया और मैसेज का इंतजार करने लगा, सरिता ने कुछ देर बाद मैसेज का जबाव दिया। बस कहानी की शुरूआत यही से शुरू हो गई फिर क्या सरिता और नीरज की प्रतिदिन फोन पर बाते हुआ करती थी समय बीतता गया और बाते ओर भी गहरी होने लगी अब नीरज को सरिता से काफी लगाव हो गया था उसे ऐसा लगने लगा कि सरिता को भी उससे लगाव हो गया है हर रोज एक दूसरे को सुबह-शाम गुड मॉर्निंग ओर गुड ईवनिंग का मैसेज करते थे। लेकिन कुछ माह बीतने के बाद नीरज ने बड़ी कोशिश के बाद सरिता को फोन से मैसेज किया और मैसेज में क्या लिखा था 143, लेकिन सरिता ने उस समय उस मैसेज का कोई जबाव नहीं दिया लेकिन हां कुछ देर बाद नीरज के पास सरिता का फोन आया और शुरू में हालचाल पूछने के बाद सरिता ने नीरज से उस मैसेज का मतलब पूछ लिया जो नीरज ने किया था। लेकिन नीरज ने ऑफिस वाले भैय्या का बहाना लेकर कहा कि मैंने नहीं किया था वह मैसेज वह तो ऑफिस वाले भैय्या ने कर दिया था लेकिन सरिता समझ गई थी उसने बोला मैं समझ गई आप जो बोलना चाहते हो। उसके बाद सरिता ने फोन काट दिया। फिर वहीं रोज की कहानी सुबह-शाम बात करना। एक दिन तो किसी बात को लेकर सरिता और नीरज का झगड़ा हो गया और सरिता ने भी नीरज को मना कर दिया कि अब मेरे पास फोन मत करना, दिन ढलता गया लेकिन शाम तक सरिता का कोई मैसेज नहीं आया नीरज परेशान होने लगा कि उसका अब तक फोन न मैसेज आया। सरिता नीरज से बहुत नाराज थी। अक्सर प्रेम में ऐसा होता है जब लड़ाई होती है तो प्रेम और गहरा होता है। कुछ दिन तक सरिता ने नीरज से बात नहीं कि नीरज उसका इंतजार करता ओर सरिता नीरज का इंतजा करती रही। नीरज ने कई बार मैसेज भी किए लेकिन कोई जबाव नहीं आया। इसी पर आधारित नीरज ने एक छोटी सी प्यार की कहानी लिखी जिसका नाम नीरज ने ‘उसकी एक कॉल का इंतजार’ रखा। नीरज की यह कहानी 1 सितम्बर 2019 को दैनिक जागरण आईनेकस्ट में प्रकाशित हुई थी। कुछ समय बाद सरिता का फोन आ ही जाता है। फिर दोनों एक-दूसरे से पूछता करने लगते है कि आपने कॉल क्यूं नहीं किया। फिर दोनों में सहमति हो जाती है। नीरज और सरिता दोनों कभी मिले ही नहीं, बस दोनों की फोन पर ही बाते होती थी। सरिता को बिना देखे ही नीरज ने एक दिन बोल ही दिया कि सरिता मैं आपसे प्यार करता हॅू लेकिन सरिता ने इस सबाल का कोई जबाव नहीं दिया उसने सिर्फ हंसी में टाल दिया ओर कहने लगी नीरज क्या आप पागल हो गए हो क्या? नीरज ने कहा नहीं यह सच है कि मैं आपसे प्यार करता हूॅ और अब आपके बिना हर दिन सूना सा लगता है बस ऐसा लगने लगा है कि सबकुछ मेरी दुनिया आप हो। लेकिन सरिता ने साफ इनकार कर दिया कि मैं आपसे प्यार नहीं करती, सिर्फ आपकी दोस्त बन सकती हॅू। ऐसा नीरज ने सरिता से कई बार प्यार का इजहार किया लेकिन लाख कोशिश के बाद भी सरिता ने हां नहीं बोला, लेकिन नीरज सरिता के लिए पागल हो चुका था। क्योंकि नीरज का यह पहला प्यार था। उसने कभी किसी से प्यार किया ही नहीं। इसी तरह नीरज और सरिता के 2 साल गुजर गए। सरिता के पापा उसी शहरी में रहते थे जिस शहर में नीरज और मोंटी रहता था। सरिता ने नीरज से कहा कि मैं अपने पापा के पास आ रही हूॅ, क्या आप मझे बस स्टैंड से मेरे पापाजी के रूम पर छोड़ देंगे। बस नीरज इस बात को सुनकर उसके अंदर खुशी कोई ठीकाना नहीं था बिना सोचे समझे उसने हां बोल दिया कहा, ठीक है मैं छोड़ दूंगा क्योंकि नीरज की उससे पहली मुलाकात होने वाली थी। अब उसके आने का इंतजार होने लगा। जिस दिन सरिता शहर आई तो जब नीरज उसे लेने के लिए गया तो जब नीरज ने उसे पहली नजर देखा तो अंदर ही अंदर बहुत खुश होने लगा और सोचने लगा कि मैंने जिससे प्यार किया वह बहुत सुंदर लड़की थी। सरिता ने भी जब नीरज को पहली बार देखा तो वह भी खुश थी लेकिन उसने नीरज से कहा कुछ नहीं, सरिता को उसके पापाजी के रूम पर छोड़ दिया। पहली मुलाकात में कुछ ज्यादा बातचीत नहीं हुई। ज्यादातर बाते फोन पर ही हुआ करती थी। नीरज की दूसरी मुलाकात एक शादी समारोह के दौरान दोनों बहनों से हुई थी जहां नीरज ने बड़ी बहन के द्वारा सरिता को एक अगूंठी दी थी। सरिता को अगूंठी बहुत पसंद आई नीरज ने फिर एक बार सरिता से पूछ लिया क्या आप मुझसे प्यार नहीं करती। लेकिन सरिता का आखिर तक सिर्फ एक ही जबाव था कि ना, लेकिन आपकी दोस्त बनकर रह सकती हूॅ। नीरज हर बार की तरह इस ना वाले जबाव को सुनकर उदास हो जाता था। लेकिन फिर जैसे ही सरिता से बात होती तो खुश हो जाता था। सरिता जिस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई कर रही थी उसके उस कॉलेज में प्रथम वर्ष की परीक्षा शुरू हो रही थी तो सरिता ने नीरज से बात करके कहा कि आप मेरे साथ चल लो या मेरी वहां किसी के पास ठहरने की व्यवस्था करा दो नीरज ने किसी तरह परीक्षा वाले शहर में उसके ठहरने की व्यवस्था कर तो दी लेकिन सरिता यह भी कहने लगी कि आपको पहले दिन मुझे वहां छोड़ना है जहां आपने बात कि है ओर पूरे दिन और रात आपके साथ रहूंगी, नीरज ने इस बात के लिए भी सहमति दे दी। नीरज उसे छोड़ने के लिए उसके परीक्षा शहर चला गया, नीरज ने अपनी एक जानपहचान वाली बहन के यहां सरिता को ले गया। सरिता के साथ पूरा दिन बिताने के बाद पता चला कि
पहले के मुताबिक सरिता के व्यवहार में बदलाव हो गया था जैसा कि वह नीरज से छुपाकर किसी और से मैसेज पर बात कर रही थी। नीरज को ये तो महसूस हो गया था कि उसने किस ओर से बात करना शुरू कर दिया था सरिता ने नीरज से उस समय कुछ इसलिए नहीं कहा क्योंकि उसे अपनी परीक्षा देनी थी नीरज उसे बहन के यहां छोड़कर अगले दिन वापस अपने शहर आ गया और फिर उससे मिलने परीक्षा के आखिरी वाले दिन सरिता के पास पहुंच गया है। वहां सरिता से मिलने के बाद उसे उसके गांव की बस में बैठाकर नीरज अपने शहर वापस आ गया। अब सरिता ने नीरज से धीरे-धीरे बात करना बहुत कम कर दिया था और नीरज को भी लगने लगा था कि सरिता किसी और से प्यार करती है लेकिन नीरज ने बड़ी कोशिश के बाद सरिता से पूछ ही लिया कि अगर आप किसी और से प्यार करते हो तो बता दीजिएगा हम आपको बात करने के लिए परेशान नहीं करेंगे। लेकिन सरिता ने पहले की तरह ही बोला कि मैं आपसे प्यार नहीं करती मैं सिर्फ आपकी दोस्त हूॅ। नीरज और सरिता दोनों की पहले की तरह अब बात नहीं होती थी। सरिता और ज्यादातर नीरज से कम ही बात करना पसंद करती थी। एक दिन नीरज अपने रूम पर रात के समय काम करते-करते अचानक फेसबुक अकाउंट सरिता के नंबर से खोलने का प्रयास कर रहा था अचानक सरिता का फेसबुक अकाउंट खुल जाता है। चैट बॉक्स में जाते ही नीरज ने एक शख्स से सरिता के रूप में बात की लेकिन कुछ देर नीरज से उस शख्स से पता ही कर लिया कि आप कौन है और सरिता से आपका क्या संबंध है उसने ज्यादा समय खराब न करते हुए साफ बता दिया है कि सरिता से प्यार कता हूॅ लेकिन जब मैंने उसे अपने बारे में बताया तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ उसने मुझसे सरिता के साथ होने का कोई सबूत मांगा और मैंने दे दिया। वह भी कुछ देर के लिए शांत हो गया और कहने लगा कि सरिता मैं पिछले पांच वर्षों से प्यार करता हूॅ और सरिता भी मुझसे प्यार करती है मैंने उस शख्स से रात के समय ही सरिता को फोन करने को कहा और मैं उसके फोन से जुड़ा था। बस अब सरिता को पता चल गया था कि नीरज और राज(सरिता को प्यार करने वाला) दोनों को सरिता के बारे में पता चल गया है कि सरिता दोनों को पागल बना रही हैं जबकि सरिता राज से बहुत प्यार करती थी उसने इस बात के लिए नीरज को बहुत कुछ सुनाया और कहने लगी मैं राज से बहुत प्यार करती हूॅ आपने हमारा ब्रेकअप करा दिया है। इसके बाद नीरज और सरिता की प्रेम कहानी का अंत यहीं खत्म हो जाता है। उसके बाद नीरज को बहुत पछतावा होता है कि मैंने अपने जीवन में पहली बार किसी से प्यार किया था लेकिन वह भी धोखा दे गई। नीरज का ब्रेकअप होने के बाद काफी समय तक खामोश रहने लगा, अंदर ही अंदर उसके बारे में ही सोचता रहता था सरिता उसके दिमाग से निकल ही नहीं रही थी। नीरज अपने दिल को लाख समझाता लेकिन सरिता को भूलाना उसके लिए आसान नहीं था कई बार तो नीरज ना चाहते हुए सरिता को कॉल और मैसेज कर देता था लेकिन सरिता ने नीरज का नंबर ब्लैक लिस्ट में डाल दिया था धीरे-धीरे नीरज अपने काम में व्यस्त हो गया और सरिता से बात करने की आदत भी छूट गई। लेकिन सरिता आज भी बहुत याद आती है। जब वह पुराने दिन याद आते हैं… नीरज आज भी सरिता के इंतजार में है उसे उम्मीद है कि सरिता एक न एक दिन उसे कॉल जरूर करेगी…

लेखक-निशांत भारती

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