उत्तराखण्डराज्य

स्पिक मैके द्वारा कथक नर्तक विशाल कृष्णा की प्रस्तुतियाँ आयोजित

देहरादून : युवाओं तक भारतीय शास्त्रीय कला को पहुँचाने के अपने सतत प्रयासों के तहत स्पिक मैके उत्तराखंड ने आज हिल्टन स्कूल और हिल फाउंडेशन स्कूल में प्रसिद्ध कथक कलाकार विशाल कृष्णा की प्रस्तुतियों का आयोजन किया। इससे पहले वे द ओएसिस देहरादून में भी अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं, जहाँ बनारस घराने की गहराई, अनुशासन, लय और कथा-वाचन से उन्होंने छात्रों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह कार्यक्रम एसआरएफ़ फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

उस्ताद शुहेब हसन (वोकल), उदय शंकर मिश्रा (तबला) और उस्ताद गुलाम वारिस (सारंगी) के साथ प्रस्तुत करते हुए, विशाल कृष्णा ने ओएसिस स्कूल में अपनी प्रस्तुति गणेश वंदना से आरंभ की, जबकि हिल्टन स्कूल में उन्होंने तुलसीदास की रचना “गाइये गणपति” पेश की, वहीं हिल फाउंडेशन स्कूल में उन्होंने अपनी प्रस्तुति शिव वंदना के साथ प्रारंभ करी। उन्होंने छोटे-छोटे तकनीकी संयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को कथक की संरचना—ताल, पैर की थाप, लयकारिता—से परिचित कराया। छात्र पूरे समय गहराई से जुड़े रहे, संगीत के साथ ताल मिलाते हुए प्रस्तुति की ऊर्जा पर सहज प्रतिक्रिया देते रहे।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण था सूरदास की रचना “मैया मोरी” से कृष्ण के माखन-चोरी प्रसंग का उनका भावपूर्ण अभिनय—यशोदा का माखन निकालना, कृष्ण का अपने सखाओं संग योजना बनाना, माखन चुराना, बांटना, पकड़े जाना और फिर मासूमियत से इंकार करना। अभिव्यक्ति में उनकी दक्षता ने शरारत, भोलापन और भक्तिभाव के हर स्वर को मंच पर जीवंत कर दिया।

विशाल कृष्णा ने कथक की विशिष्ट शैली को पशु-पक्षियों के चलन—साँप, हाथी, मोर और हिरन—की अदाओं के माध्यम से भी प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने शानदार परन, तीनताल की विविधताओं, तबला संग जुगलबंदी और ताल-लय पर आधारित गेंद-खेल तकनीकों से विद्यार्थियों को खूब आनंदित किया।

दोनों विद्यालयों में प्रस्तुति के दौरान छात्रों में अद्भुत एकाग्रता, उत्साह और जिज्ञासा देखने को मिली। लय, कथा और अभिव्यक्ति से भरपूर उनका नृत्य न केवल कथक की सुंदरता को सामने लाया, बल्कि युवाओं के लिए भारतीय शास्त्रीय विरासत को समझने का सार्थक माध्यम भी बना।

1991 में वाराणसी में जन्मे विशाल कृष्णा आचार्य सुखदेव महाराज के कुल से ताल्लुक रखते हैं और पद्मश्री पंडित गोपी कृष्ण के भतीजे हैं। तीन वर्ष की आयु से अपनी दादी, कथक सम्राज्ञी सितारा देवी से प्रशिक्षण आरंभ करने वाले विशाल कृष्ण ने आगे चलकर पंडित मोहन कृष्ण और पंडित रवि शंकर मिश्रा के मार्गदर्शन में अपनी कला को और निखारा।

उन्हें वर्षों में कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें पंडित बिरजू महाराज संगीत समृद्धि सम्मान (2012), उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार (2015), कला विभूति सम्मान (2016), यूपी संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2020), पद्मविभूषण पंडित केलुचरण युवा प्रतिभा पुरस्कार (2023), नृत्य मयूर अवॉर्ड लॉस एंजेलिस (2024) और काशी लीडरशिप एक्सीलेंस अवॉर्ड (2024) शामिल हैं।

27 नवंबर को विशाल कृष्णा अपनी अगली प्रस्तुतियाँ यूनिवर्सल अकादमी और पुरकुल यूथ डेवलपमेंट सोसाइटी देहरादून में देंगे।

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