उत्तराखण्डराज्य
कितल्ड़ा नाग अर बिराला बाग…

कितल्ड़ा नाग अर बिराला बाग
बल गौ गौ मणस्वाग
बगुला होईया घाघ
घुगुती भुली रंग राग…।
मिस्त्री मनाणु पूजा छठ
नाई दर्जी तुरीकट
हमारी तुमारी इक्की रट
उद्धा चला झटपट..।
बुल्ला निल्ला सड़की पार
चांदु बिना खाली गुट्ठीयार
थैली पन्नी ल्याई बजार
सदराला ठोकलिया सब्भी औजार..।
बांजा खेत सुक्का खल्याण
सुंगर बान्दर कुटड़ा घाण
बाघ रीख लगयाँ बितकाण
ज्वानी पाणी उद्धि बूरकांण…।
ब्वारी गई अंग्रेजी बचौण
बूढ बुढ़ियों की धरी धौण
खून पसीना कनूकई भुलौण
टल्ला टांका छन लगौण…
भुला भैजी दगड़ियों की बाणी
इक हैक्का की सरियों म ताड़ी
तखी कामाड़ी तखी समाड़ी
बांजा ढोल्ली बाबा दादा की सीरवाणी
रँगीलो पिंगीलो पाड़
धार बुग्याल बगुली ताड़
तीतर लग्यान डोखरी नपाँण
आवा.. अब यू पाड़ बचौण..।
———————————–राकेश…!




