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दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने 29वें विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन में संत राजिन्दर सिंह महाराज को अध्यात्म का मार्गदर्शक बताया

नई दिल्ली। विश्व-विख्यात आध्यात्मिक गुरु और सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख, संत राजिन्दर सिंह महाराज की अध्यक्षता में 13 से 20 सितंबर, 2025 तक 29वें विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। 20 सितंबर को सम्मेलन के समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौजूद थीं। इसके अलावा लोकसभा सांसद मनोज तिवारी, भाजपा विधायक अशोक गोयल और अन्य कई प्रसिद्ध धर्मगुरु और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
सम्मेलन की शुरूआत में 13 सितंबर को मानव-कल्याण के लिए 65वें रक्तदान शिविर आयोजन कृपाल बाग, दिल्ली में किया गया। इसके अलावा 14 सितंबर को 41वां निःशुल्क नेत्र जाँच एवं मोतियाबिन्द ऑपरेशन शिविर आयोजन भी कृपाल बाग, दिल्ली में किया गया। जिसमें सैकड़ों लोगों को दृष्टि का वरदान प्राप्त हुआ। यह सम्मेलन संत राजिन्दर सिंह महाराज के जन्मदिवस पर आयोजित किया गया, जिसे पूरे विश्वभर में ‘अंतर्राष्ट्रीय ध्यान-अभ्यास दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।


अपने विश्व-कल्याणकारी संदेश में संत राजिन्दर सिंह महाराज ने सम्मेलन के समापन सत्र आए एक विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि ध्यान-अभ्यास के द्वारा इंसान के अंदर बदलाव लाया जा सकता है, जिसकी आज के समय में बहुत आवश्यकता है।
उन्होंने आगे कहा कि, 29वां विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन हमारे सामने आत्म-साक्षात्कार का मार्ग खोल रहा है। प्रत्येक धर्म के दो पहलू होते हैं, एक बाहरी और दूसरी अंदरुनी। सभी धर्मों के बाहरी पहलू अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सबका अंदरुनी पहलू हमें एक ही लक्ष्य की ओर ले जाता है और वह है पिता-परमेश्वर से मिलाप। यह पहलू हमें ध्यान-अभ्यास के द्वारा प्रभु को अपने भीतर खोजने की ओर जोर देता है। जिस प्रकार एक बाहरी गुरु सांसारिक ज्ञान प्रदान करता है, ठीक उसी प्रकार एक पूर्ण संत-सत्गुरु हमें आंतरिक ज्ञान प्रदान करते हैं। वे हमारी आत्मा और परमात्मा के बीच एक मध्यस्थ बनकर हमें आत्मिक रूप में जानने और पिता-परमेश्वर को अपने अंदर ही अनुभव करने में हमारी मदद करते हैं। वे हमें प्रभु के दिव्य-प्रकाश से जोड़ने में हमारी सहायता करते हैं, जिससे कि हमें जीवन के सच्चे उद्देश्य को पूरा करने में मदद मिलती है।
सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संत राजिन्दर सिंह महाराज को अध्यात्म का मार्गदर्शक बताया और लाखों लोगों को आत्म-ज्ञान का मार्ग दिखाने के लिए संत राजिन्दर सिंह महाराज का दिल की गहराईयों से आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि, एक सच्चे मार्गदर्शक के जन्मदिन के पावन अवसर पर यहां उपस्थित होना मेरा सौभाग्य है। उन्होंने संत राजिन्दर सिंह जी महाराज को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, उनका जीवन अध्यात्म और विज्ञान का अद्भुत मिश्रण है। एक वैज्ञानिक के रूप में सर्वोच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने मानवता की सेवा करना चुना और सभी को आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर करते हुए आज पूरे विश्व में आंतरिक शांति और निस्वार्थ सेवा का संदेश फैला रहे हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संत राजिन्दर सिंह महाराज से आशीर्वाद लिया और कहा कि, ऐसे महान संतों की पावन उपस्थिति में ही सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर दिल्ली के मॉडल टाउन क्षेत्र के विधायक अशोक गोयल ने मानवता को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने के लिए संत राजिन्दर सिंह महाराज की प्रशंसा की और मानव एकता के लिए उनके अपार योगदान की सराहना की।
सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए लोकसभा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि, वे संत राजिन्दर सिंह महाराज के रूहानी आकर्षण से प्रभावित हुए हैं और उनकी दिव्य-उपस्थिति में रहकर स्वयं को वे धन्य महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि उनके जन्मदिन को ’प्रकट दिवस‘ के रूप में मनाना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरूआत में माता रीटा ने विदेशी भाई-बहनों के साथ मिलकर गुरु अर्जन देव जी महाराज की वाणी से एक शब्द का गायन किया, जिसके बोल थे, “कोई बोले राम-राम, कोई खुदाय” (कुछ लोग प्रभु को राम-राम कहते हैं और कुछ लोग खुदा) सम्मेलन में धार्मिक नेताओं और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भी ध्यान-अभ्यास और आध्यात्मिकता पर अपने विचार रखे। जिनमें हरिद्वार से आए महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी प्रेमानंद जी महाराज, अखिल भारतीय संत सीमिति के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी देवेन्द्रानंद गिरि महाराज, वेदांत आश्रम से आए श्री श्री भगवानाचार्य जी महाराज, जुडा हयाम से आए रब्बी ऐजेकिल इज़ाक मालेकर, हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह से आए सैयद फरीद अहमद निज़ामी, शुक्रधाम जैन मंदिर से आए विवेक मुनि महाराज, बौद्ध धर्म के आचार्य येशी फुटसोक और ईसाई धर्म से फादर दीपक वेलेरियन टोरो शामिल थे। अमेरिका से कॉर्लोस लोज़ानो और इंग्लैंड से आई लारा रियोस ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि के रूप में सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया।
बौद्ध धर्म के आचार्य श्री येशी फुंटसोक जी ने उपस्थित लोगों आंतरिक शांति प्राप्त करने के लिए संतों की शिक्षाओं को अपने जीवन में ढालने का आग्रह किया। स्वामी देवेन्द्रानंद गिरि ने दुनियाभर में शांति और प्रेम फैलाने के लिए संत राजिन्दर सिंह महाराज की प्रशंसा की। जबकि वेदांत आश्रम से पधारे श्री श्री भगवान आचार्य जी ने जीवन में गुरु की आवश्यकता पर जोर दिया। अंतर्राष्ट्रीय वक्ता कॉर्लोस लोज़ानों ने कहा कि संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने “आध्यात्मिकता के स्वर्ण युग” की शुरूआत की है।
सम्मेलन के समापन में रब्बी एजेकिल इज़ाक मालेकर द्वारा घोषणा पत्र पढ़ा गया, जिसे भाग लेने वाले सभी आध्यात्मिक नेताओं और विशाल जनसमूह ने सर्वसम्मति से अपनाने की प्रतिज्ञा ली। 20 सितंबर को संत दर्शन सिंह धाम, बुराड़ी, दिल्ली में वस्त्र वितरण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें जरूरतमंद भाई-बहनों को कपड़े, जूते और किताबों आदि का वितरण किया गया।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के 79वें जन्मदिवस के अवसर पर सावन कृपाल रूहानी मिशन की ओर से अनेक एनजीओ में दवाईयाँ, सब्जियां, फल व अन्य उपयोगी उपकरणों का मुफ्त वितरण किया गया।
पिछले 35 से अधिक वर्षाें से, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने उन लोगों के लिए अध्यात्म का मार्ग खोल दिया है, जो जीवन के अर्थ और उद्देश्य की खोज कर रहे हैं। ध्यान-अभ्यास और आध्यात्मिकता के माध्यम से आंतरिक शांति को बढ़ावा देने की दिशा में उनके कार्यों के लिए संत राजिन्दर सिंह जी महाराज को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।

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