उत्तराखण्डराज्य

शब्द ही फूल है शब्द ही तीर…

शब्द ही फूल है शब्द ही तीर

दोनो वापस आने है

सोच समझ के फेंक

कर्म की रीत निराली

वही बनेगी गीत

ज़िसकी तुने दुनिया बदली

वही ब्दलेगे रीत

शब्द ही फूल है शब्द ही तीर

दोनो वापस आने है

सोच समझ के फेंक

प्रभु गा गये गीता मे

यही कर्म की रीत

कर्म भूमी मे जो बीज गिरेंगे

काटे बने या फूल

शब्द ही फूल है शब्द ही तीर

दोनो वापस आने है

सोच समझ के फेंक

स्वरचित 

नवींन उनियाल

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