उत्तराखण्डराज्य

हो गयी दिवाली जलाये दिये…

हो गयी दिवाली जलाये दिये

फूटे बम जली फुलझडी

सच मे हुआ प्रकाश

या फिर छाया अंधकार

ह्रदय मे आया आंनन्द

य़ा फिर हुआ अंधकार

राम आये सिया संग

हुआ क्या प्रेमं का संचार

य़ा फिर यू ही

अंनसुलझा सा रहा मन

राकेट सा उडा

दूर गगन मे ह्रदय

खाली हाथ फिर वापिस आया

फिर खुसी की तलाश मे

न हुये क्या फिर क्लेश कलह घर मे

जली क्या शक की दरारे

भरी क्या प्रेमं से ह्रदय की खाई

हुआ कुछ ऐसा जो प्रेंम बढाता

उत्सव का मतलब तब समझ मे आता

रिस्तो से न रिस्ता खून तब समझ मे आता

मतलब की दुनिया मे मतलब के लोग

नकली मुस्कान लिये यू गले न मिलते

राम ह्रदय मे बसते

दीये प्रेमं के जलते

आनन्द प्रकाश का होता

तब होती दिवाली

स्वरचित 

नवीन (मित्र )उनियाल

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