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शून्य शुक्राणु स्थिति से पीड़ित होने के बावजूद देहरादून के व्यक्ति ने जैविक पिता बनने में सफलता पाई

देहरादून। देहरादून के एक दंपति तीन सालों से फर्टिलिटी की समस्याओं से जूझ रहे थे। कई क्लिनिक्स में उन्हें डोनर स्पर्म का उपयोग करने का परामर्श भी दिया जा चुका था। लेकिन नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी में आने के बाद उन्होंने पिता के स्पर्म से ही एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। देहरादून में 34 वर्ष की अंजलि (बदला हुआ नाम) और 36 वर्ष के राहुल (बदला हुआ नाम) की शादी को पाँच साल हो चुके थे। वो तीन साल से कोशिश कर रहे थे, पर गर्भ धारण नहीं कर पा रहे थे। राहुल और अंजलि इसका इलाज कराने के लिए कई क्लिनिक्स में गए, पर हर जगह उन्हें डोनर स्पर्म की मदद से गर्भधारण करने का परामर्श दिया गया।
यह इलाज डॉ. अभिनय सिंह सेंगर, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी, देहरादून और उनकी टीम के द्वारा किया गया। डॉ. अभिनय सिंह सेंगर ने बताया, ‘‘हार्माेन का असंतुलन आमतौर से महिलाओं को होता है। लेकिन कभी-कभी पुरुषों में भी हार्माेन असंतुलित हो जाते हैं, जिसका असर उनकी फर्टिलिटी पर पड़ता है। पुरुषों में हार्माेन रिप्लेसमेंट थेरेपी के सफल होने की दर केवल 20 से 25 प्रतिशत है। हमने उन दोनों को इस बारे में खुलकर परामर्श दिया था ताकि उनकी अपेक्षाएं भी उसी के अनुरूप रहें। हार्माेन रिप्लेसमेंट थेरेपी केवल तभी सफल होती है, जब हार्माेन का स्तर कम होता है, लेकिन इसके लिए टेस्टिकल की संरचना का सामान्य होना जरूरी है। दो महीनों के इलाज के बाद राहुल के शरीर में टेस्टोस्टेरोन बढ़ने लगे। तीन महीनों के बाद उनके सीमन में स्पर्म दिखाई देने लगे। यह उन दोनों के लिए बहुत खुशी का क्षण था।’’
नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी में फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, डॉ. अभिनय सिंह सेंगर ने कहा, ‘‘भारत में पुरुषों की इन्फर्टिलिटी के बारे में खुलकर बात नहीं की जाती है, पर इन्फर्टिलिटी की कम से कम 40 प्रतिशत समस्याएं उनके कारण होती हैं। देहरादून में लोग अभी भी इन समस्याओं के बारे में बात करने से कतराते हैं। पुरुषों का अक्सर यह मानना होता है कि अगर वो यौन संबंध बना पा रहे हैं, तो उनकी फर्टिलिटी अच्छी है। जबकि ऐसा नहीं है। फर्टिलिटी के बारे में पता तब चलता है जब उनकी शादी हो जाती है और कोशिश करने के बाद भी उन्हें बच्चा नहीं हो पाता है। इसलिए समय पर फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट का परामर्श लिया जाना बहुत आवश्यक है। अगर इन्फर्टिलिटी की समस्या हो रही है, तो तुरंत फर्टिलिटी एक्सपर्ट को दिखाना चाहिए। फर्टिलिटी के इलाज में उम्र की बहुत बड़ी भूमिका होती है।’’
इसका कारण यह था कि राहुल एक गंभीर बीमारी एज़ूस्पर्मिया से पीड़ित थे। इस स्थिति में पुरुषों के शरीर में स्पर्म बिल्कुल भी नहीं बनते हैं। एज़ूस्पर्मा हाईपोगोनेडोट्रोपिक हाईपोगोनेडिज़्म (हाईपो हाईपो) के कारण होता है। इस बीमारी में दिमाग में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि में विकार के कारण पर्याप्त सैक्स हार्माेन (जैसे टेस्टोस्टेरोन) नहीं बन पाते हैं। फर्टिलिटी के लिए पुरुषों के सैक्स हार्माेन बहुत आवश्यक होते हैं क्योंकि उनसे स्पर्म का उत्पादन और विकास नियंत्रित होता है। यौन स्वास्थ्य बनाए रखने तथा स्वस्थ और गतिशील स्पर्म के उत्पादन के लिए ये हार्माेन पर्याप्त संख्या में होना बहुत जरूरी है। राहुल को हार्माेन का यह विकार जन्म से ही था। परीक्षण करने पर पता चला कि यह किसी अनुवांशिक प्रवृत्ति के कारण नहीं था, बल्कि यह केवल विकास संबंधी समस्या थी। इस समस्या में पुरुषें में यौनेच्छा भी कम हो जाती है। पुरुषों में अन्य यौन विकारों से अलग इस समस्या में टेस्टोस्टेरोन बहुत कम हो जाते हैं और स्पर्म का उत्पादन बंद हो जाता है। राहुल का मेडिकल परीक्षण करने पर पता चला कि उनके शरीर में स्पर्म बिल्कुल भी नहीं बन रहे थे। उनके शरीर में फर्टिलिटी के लिए जरूरी सभी हार्माेन जैसे एफएसएच, एलएच, टेस्टोस्टेरोन आदि सामान्य के मुकाबले बहुत ज्यादा कम थे।
उनके लिए एक विकल्प डोनर स्पर्म का इस्तेमाल था, पर नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी में फर्टिलिटी विशेषज्ञों ने उन्हें इससे पहले हार्माेन रिप्लेसमेंट थेरेपी कराने का परामर्श दिया। इस थेरेपी में उन्हें तीन महीने तक हर हफ्ते हार्माेन के इंजेक्शन दिए गए और उनके सीमन की लगातार निगरानी की गई।
इसके बाद राहुल और अंजलि ने आई.वी.एफ ट्रीटमेंट कराया। हालाँकि उनका पहला प्रयास सफल नहीं हुआ, पर जनवरी 2025 में दूसरे प्रयास में उन्हें सफलता मिली। अंजलि का गर्भ बिना किसी दिक्कत के स्थापित हो गया और सितंबर में उन्होंने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि फर्टिलिटी का परीक्षण महिला और पुरुष, दोनों को एक साथ कराना चाहिए। डोनर स्पर्म पर जाने से पहले हमें इलाज की सभी उपलब्ध संभावनाओं पर गौर करना चाहिए। व्यक्तिगत इलाज की मदद से फर्टिलिटी की गंभीर से गंभीर समस्याओं को दूर किया जा सकता है और दंपति को अपने स्वयं के अंडों एवं स्पर्म द्वारा गर्भधारण करने में समर्थ बनाया जा सकता है।

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