उत्तराखण्डराज्य
हियूंद का दीनू…

हियूंद का दीनू
कनी लगी बणाग
पूंडालू खैगी सुंगर
कीकू खाणी साग..
भैर बर्फ, भितर सिल्ली आग
भर भर भबरादी
परदेशी भज्ञान
तेरी छ जाग…
पार सड़की, मस्ती म लोग
सभ्यता संस्कृति कू मखोल
गोसी न ग्वाल्या
जनु चा झकोल..
नया जमाना कू नऊ हियूंद
अगेठी काकर सदराला हुक्का
बाबाजी की तिबार सिमट पोतियाली
पहाड़ म लगड़ा भौतिकता का तुक्का..
घुगुती चलिगी, पोथीली तैयार
बगुला दोबणा, ब्यालर भी खोजणा,
घेन्डुली मारनी आखिरी तांण
अपड़ी खैरी आफुमै लागण…
बेड़ कू पाणी ऎच चिड़िगी
अपड़ा धरा आग लगैगी
सड़की की डोखरी तीतर लुछैगी
अपड़ा कुड़ा की आग हमै सेकैगी…।
-राकेश उनियाल



