विश्व धरोहर फूलों की घाटी को खोलने की पार्क प्रसाशन ने की तैयारी पूरी,1 जून को खुलेगा पार्क

चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )
विश्व धरोहर फूलों की घाटी को जोड़ने वाले पैदल मार्ग को वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क प्रशासन द्वारा दुरस्त कर दिया गया है, 1 जून को खुलेगी यूनेस्को विश्व प्राकृतिक धरोहर फूलों की घाटी, इस बार दिखेगा घाटी में दिखेगा हिमखंड का दुर्लभनजारा।
विश्व धरोहर स्थल फूलों की घाटी बियावान प्रकृति प्रेमियों और आम पर्यटकों के लिए 1 जून से खुलने को तैयार है, जहां पार्क प्रशासन ने घाटी के पैदल संपर्क मार्ग सुचारु कर दिया है। तो वहीं, वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क की रेंज ऑफिसर चेतना काण्डपाल ने घाटी का निरीक्षण करते हुए जानकारी दी है कि घाटी के प्रवेश द्वार को 1 जून को द्वार पूजन के बाद प्रकृति प्रेमियों के लिए खोल दिए जाएंगे, बताया कि, पार्क कर्मियों द्वारा घाटी की लगातार गश्त कर निगरानी की जा रही है, घाटी में शीतकाल में बर्फबारी से टूटे पैदल क्षतीग्रस्त रास्तों को दुरस्त किया गया है साथ ही बामन धोड और स्यूचंद नाले में अस्थाई पुलिया भी बन कर तैयार है, वहीं इस बार फूलों की घाटी की सैर के दौरान पर्यटक घोसा नाले और लेगी नाले में हिमखंड का दीदार भी कर सकेंगे। अब सिर्फ इंतजार है तो फूलों की घाटी के खुलने का. इसके लिए पार्क प्रशासन ने सभी जरूरी इंतजाम कर दिए हैं।
फूलों की घाटी प्रत्येक वर्ष एक जून से 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है। यहां जैव विविधता का खजाना बिखरा पड़ा है। तो बस बैग पेक करें और चले आएं इस बार नंदन कानन की सैर के लिए फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान आपके स्वागत के लिए तैयार है।
बता दें यूनेस्को की ओर से विश्व धरोहरों में शामिल की गई फूलों की घाटी में प्रतिवर्ष 300 से अधिक प्रजातियों के हिमालयी पुष्प खिलते हैं। यहां फूल जून के मध्य से अगस्त तक के मध्य तक खिलते हैं। ऐसे में इन दिनों फूलों की घाटी में विभिन्न प्रजाति के हिमालयी फूल खिल गये हैं।
समुद्रतल से करीब 12995 फीट की ऊंचाई पर स्थित है विश्व धरोहर फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क चमोली जनपद में समुद्रतल से 12 हजार 995 फीट की ऊंचाई पर करीब 87.5 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के तहत आती है। अपने दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवन रंग-बिरंगी तितलियां, हर्बल जड़ी-बूटीयो व बेस कीमती जीवन दायिनी वनस्पतियां, प्राकृतिक झरनों के साथ रतवान ग्लेशियर से निकल कर घाटी के मध्य बहने वाली पुष्पावती नदी, और दूर-दूर तक फैले ग्लेशियर, ऊंचे बर्फीले पहाड़ घाटी का सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। वहीं पथा रोहन के शौकीनों के लिए यहां 17 किमी लंबा ऐतिहासिक रोमांचक फूलों की घाटी कुंठ खाल हनुमान चट्टी ट्रैक भी है।




