उत्तराखण्डराज्य

उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद का डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन, छूटे हुए आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण की उठी मांग

देहरादून: उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन में योगदान देने वाले उन हजारों कार्यकर्ताओं के चिन्हीकरण की मांग को लेकर जिन्हें अब तक सरकारी प्रक्रिया से वंचित रखा गया है, उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद ने बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन तहसीलदार सदर श्री सुरेंद्र देव को सौंपा, जिन्होंने अपने स्तर से आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।
मुख्य माँगें
परिषद द्वारा प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में तीन प्रमुख माँगें रखी गईं:
1. छूटे हुए आन्दोलनकारियों का चिन्हीकरण – राज्य आन्दोलन के वे सभी सक्रिय कार्यकर्ता जो विभिन्न कारणों से चिन्हीकरण की प्रक्रिया में छूट गए हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित किया जाए।
2. मापदण्डों को सरल एवं पारदर्शी बनाया जाए – वर्तमान जटिल प्रक्रिया के कारण अनेक पात्र लोग चिन्हीकरण से वंचित रह गए हैं। मापदण्डों को सरल, पारदर्शी एवं तर्कसंगत बनाया जाए।
3. पेपर कटिंग तथा वरिष्ठ आन्दोलनकारियों की संस्तुति को प्राथमिकता – समकालीन दस्तावेज (समाचार-पत्रों की कतरनें) और उन वरिष्ठ आन्दोलनकारियों की अनुशंसा जिन्होंने स्वयं आन्दोलन का नेतृत्व किया हो, को प्रमाण के तौर पर प्राथमिकता दी जाए।
परिषद का कहना है कि कई ऐसे आन्दोलनकारी हैं जिनके पास उस समय के कोई लिखित प्रमाण नहीं हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति और भूमिका वरिष्ठ साथियों तथा समकालीन समाचारों से प्रमाणित होती है।

इससे पहले, 2021,022,023,2024,025 में विभिन्न आन्दोलनकारी संगठनों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर चिन्हीकरण प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की मांग की थी। 2023 में आन्दोलनकारियों ने सचिवालय कूच कर शासन को ज्ञापन सौंपा था तत्पश्चात 9 नवम्बर 025 को मुख्यमंत्री आवास कूच। 2025 में कई जिलों में धरने हुए, लेकिन प्रशासन ने मापदण्डों में कोई ढील नहीं दी।गत माह परिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी के सचिव व गृहसचिव सेश्री शैलेश बगोली से भेंटकर उन्हें चिन्हीकरण से सम्बंधित ज्ञापन दिया
जनवरी 2026 में ही परिषद ने चेतावनी दी थी कि यदि छूटे हुए आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो व्यापक आन्दोलन किया जाएगा। आज का प्रदर्शन उसी चेतावनी की कड़ी में किया गया। आन्दोलनकारियों का आरोप है कि 13 जिलों में चिन्हीकरण की प्रक्रिया ठप पड़ी है और प्रशासन द्वारा जानबूझकर लोगों को वंचित रखा जा रहा है।

प्रदर्शन में शामिल प्रमुख
पदाधिकारी एवं संरक्षक:
संरक्षक नवनीत गुंसाई, सचिव (सीपीएम) अनन्त आकाश, जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार, वरिष्ठ आन्दोलनकारी बालेश बबानिया।अन्य प्रमुख लोगों में अम्बुज शर्मा, सन्तन रावत, चिन्तन सकलानी, राजेश शर्मा, प्रभात डण्डरियाल, पुष्पलता वैश्य, अमित परमार, नुरैशा, उषा शर्मा, बृजमोहन भट्ट, मोनिका, शबनम, गीता बिष्ट, सुमित्रा देवी, रामदुलारी, शीला देवी जखमोला, गौरा देवी, शान्ति रावत, सीता देवी, शाकुम्बरी रावत, सुशीला देवी, राजेश्वरी, कल्पेश्वरी, सर्वैश्वरी बहुगुणा, सुरेशी नेगी, शान्ता उनियाल, मुकेश मोधा, इन्द्रा देवी, जमुना देवी, गंगा थापा, इन्द्रदत्त बहुगुणा, गुरु प्रसाद आदि बडी संख्या में आन्दोलकारी शामिल थे।
इसके अतिरिक्त सैकड़ों अन्य चिन्हीकरण से वंचित आन्दोलनकारी मौजूद रहे। सभी ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई।
तहसीलदार सदर श्री सुरेंद्र देव ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा कि वे अपने स्तर से आवश्यक कार्यवाही करेंगे और मामला उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। हालाँकि, प्रदर्शनकारी नेताओं ने कहा कि अब तक इसी तरह के आश्वासन देकर टालमटोल की गई है,ज्ञापन सौंपने के बाद परिषद के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर माँगों पर सम्मानजनक हल नहीं निकाला गया तो संयुक्त परिषद व्यापक आन्दोलन के लिए विवश होगी। जिसमें मुख्यमंत्री आवास कूच भी शामिल है,आगामी रणनीति पर चर्चा के लिए शीघ्र ही एक विस्तृत बैठक बुलाई गई है। इस दौरान मौजूद आन्दोलनकारियों ने कहा कि जब तक सभी पात्र लोगों का चिन्हीकरण नहीं होता, आन्दोलन जारी रहेगा।

Related Articles

Back to top button