मार्कण्डी की फोज पुलिस….!

तेरह नौ सैंतालीस
सकलाना क्रांति दिवस ,
नमन भूमि तुम्हे
झुकाई मारकंडी की फोज पुलिस ।
लाव लश्कर बहुत बड़ा,
घोड़े खच्चरों ,हथियारों से लैस
नादिरशाही याद दिलाती
मार्कण्डी की फोज पुलिस ।
उनियाल गांव को ललकारा,
हवेली में दागे कारतूस
मज गांव में घेरा डाला
मार्कण्डी की फोज पुलिस ।
थाती का गांव मजगांव हमारा
स्वाभिमानी शीश
नहीं झुका , रहा तनकर खड़ा
बौखलाई मारकंडी की फोज पुलिस ।
रौदी फसले ,मचाई लूट
रात रात घरों में दबिश
क्रूर होगी मराकंडी की फोज पुलिस ।
आलू के तोल मोल को
बनाया सिंडीकेट रईश
अन्याय सोषण की पराकाष्ठा
करती मरकंडी की फोज पुलिस ।
क्यारा भटाबेडी से साथ मिला
बना था कैंप कुछ दिवस
आंतकी की तरह
थी जबतक मरकंडी की फोज पुलिस ।
अत्याचार तुम्हारा, दंडकी पुकारता
खूब डटे गांव हमारे छत्तीस
स्वाभिमान झुकाने आए थे झुका न कोई शीश ।
डर गई थी मरकंडी की फोज पुलिस ।
आखों पे अन्याय का पर्दा,
चमचे तुम्हारे खबर नबीस
आजाद हुआ सकलाना फिर वनी पंचायत आजाद
भागी मरकांडी की फोज पुलिस ।
हर घर हर जीव ने झेला
बुझी आजादी की तीस
लौटी खाली हाथ मार्कण्डी की फोज पुलिस ।
धन्य धन्य सकलाना
धन्य वो पूर्वज नवाजो शीश
सत्य अहिंसा के दम पर
भगाई मारकंडी की फोज पुलिस ।
छोटे बड़े स्वार्थ मत पालना
रखो बनाए एकता की टीस
जैसे साधन बिहिन लोगो के
भगाई मारकंडी की फोज पुलिस ।
___________राकेश_!
13सितंबर 1947, सकलाना क्रांति दिवस पर स्वाधीनता सेनानियों और तत्कालीन सकलाना की महान जनता को सादर समर्पित । शत शत नमन ।
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