उत्तराखण्डराज्य

औ चल खैली….

औ चल खैली
भड्डू की दाल चासणी कू भात,
जमीन कू आसन
अर मालू का पात।

पहाड़ की जिम्मण
गजब कू अनुशासन,
छोटू न बडू
भई बंधी कू शासन ।

लड़बड़ी दाल फुरफुरू भात
धारा कु पाणी तुड़का की मर्च,
माटी की खुश्बू
अर संस्कृति कू विमर्श ।

लाखड़ों की भट्टी रसोईया की रसांण
पुजी रसोई पूर्वजु कू रिवाज
पहाड़ी अंदाज पहाड़ की शान
औंदी नी याद तुम नी लगदा परवाज ।

मार्डन बड़ना हम खड़ा खड़ा खाड़म
लैनम लगीक धक्का मुक्का देणम
न कुई पुछदारू न गड़दारू
पिंडू कर छकड़ा छौ स्वाद गई भाड़म ।

अवा लौटा अपणा चौक गुठयारम
पहाड़ की संस्कृति पाड़ का रिवाजुम
जख छै वखी फैलावा देश परदेशम
ई संस्कृति शैरू बजारूम ।
________राकेश_!

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