उत्तराखण्डराज्य
ज़ल तो गया पर मन से न गया…

ज़ल तो गया पर
मन से न गया
तू तप के स्वर्ण
बन गया
तू ने छला
प्रभू राम को
तुझे हर साल दुनिया ने छला
जला ड़ाला तन तेरा
मन दुनिया संग चला
दस सिर तेरे थे सामने श्री राम के
तभी तो तू मर
प्रभु बाण से स्वर्ग चला
आज का रावण
दश सर छिपा
मन्द मन्द मुस्करा
तुझको ज़ला
घर चला
कौन जला
कौन छला
कौन जाने
किस्को पता चला
ये तो कल्युग है प्यारे
यहा हर् साल रावण
बडता रहा
धुम धडाके के
साथ फूटता रहा
श्री राम का कद छोटा
रावण का बडा होता रहा
स्वरचित
नवीन उनियाल ( मित्र )



