उत्तराखण्डराज्य

मैं क्यों लिखता हूं

मैं क्यों लिखता हूं

कब लिखता हूं

मैं बाबरा बिलकुल नही

हालत का ललकारा हूं ।

मुझे घुगूती से प्यार है

बढ़ते बागुलो से तकरार है

में सह लूंगा प्रबास हिलास का

हर बगुले पर अविश्वास है ।

मुझे मेरी मां की पसीना

पसीने की खुश्बू याद है

याद है पुरखों का

किरमोले सा श्रम याद है ।

मुझे याद है

अंगारे वाले पथिक

गर्व हैं मुझे मेरे क्षेत्र के

शहीद का कौथिक ।

मैं न कवि न कोई लेखक

जाने क्यों चलती है कलम

अनजाने में ही सही

लेती है कविता जलम ।

कविता,टूटे ख्वाबों पर

मन का मरहम

मैं जगाना चाहता हु ख्वाब

जमाना है बेरहम ।

____________________राकेश___!

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