उत्तराखण्डराज्य
उल्लू के पठौ पर ही मेहरभां है लक्षमी…

उल्लू के पठौ पर ही मेहरभां है लक्षमी
पडे लिखो को सरस्वती भानी है
ये दुनिया अजब निराली है
उल्लूऔँ की ही दिवानी है
हाथ मे पिस्टल मुख मे गुटका
आखो मे सूखा नशा
आज की नारिया
उनकी दिवानी है
क्या कहे नवीन दुनिया की रीत
ये दुनिया अजीब दिवानी है
कसमे रसमे सब झूटे
दिल भावनाये सब टूटे
सबकी अजीब कहानी है
उल्लू के पठौ पर ही मेहरभां है लक्षमी
ये दुनिया उनकी दिवानी है
मत झाकना दिल मे
खाली कोठरी कालिख पुरानी है
चेहरे पर चेहरे लिये घूम रहा
हर इंसान यहा
गले मिल चिपकने की
सबको बीमारी है
धोखे की नीव पर
रिश्तो की मंजिले खडी है
वाह री दुनिया
भरोसे की अब सबमे कमी है
उल्लू के पठौ पर ही मेहरभां है लक्षमी
दिन मे अंधेरा रात रोशनी बडी है
स्वरचित
नवीन (मित्र )उनियाल
देहरादून



