उत्तराखण्डराज्य
फकीरी में ही मजा…

फकीरी में ही मजा
बेपरवाह हो फिजा
घुमक्ड़ी से रिझा
दौलत को लजा ।
न हो जरूरी ताला
न तीर न भाला
टांग कर झोला
घूम दुनिया का मेला ।
जीवन तो झगोला
दिन चार का खेला
किसने न झेला
बस पेलमपेला ।
एक का दो, दो का चार
फिर भी मुसीबत हजार
झंझट कई प्रकार
कहीं नगद कहीं उधार ।
ले के मस्ती का डोज
करके बेफिक्री का भोज
कर खुशियों की खोज
उतार बेपेदी के बोझ ।
न रहीम हो न राम
कर दिल से काम
इसका उसका नाम
बेकार के तामझाम ।
कर भाईचारे की सैर
नहीं कोई गैर
हो सबकी खैर
न दुश्मन से बैर ।
हो नजर भी एक
न कान आंख में फरक
इधर न उधर सरक
हो मस्त मौली खड़क ।
राम का हो राज
या रावण को ताज
मत बनाना दास
गवाह है इतिहास ।
क्यों धोना हाथ
बहती गंगा के साथ,
दुरंगा होगा गात
बिना शह होगी मात ।
!__राकेश__!


