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रेवोल्यूशनारी पहल के तहत, पेप्सिको इंडिया ने एचएसआरएलएम और इंडस एक्शन के साथ साझेदारी में लखपति दीदी योजना को मजबूती दी

  • आजीविका योजनाओं और रियायती ऋण आसानी से उपलब्ध करवाकर तीन सालों में
  • 1.1 लाख महिलाओं को लखपति दीदी (पीएलडी) के रूप में सशक्त बनाया जाएगा

New Delhi: अपनी रेवोल्यूशनारी पहल के तहत, पेप्सिको इंडिया ने हरियाणा सरकार की लखपति दीदी योजना के कार्यान्वयन को और मजबूत करने के लिए हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) और इंडस एक्शन के साथ साझेदारी की है। यह पहल पेप्सिको इंडिया के ‘पार्टनरशिप ऑफ प्रोग्रेस’ के दर्शन पर आधारित है और इसका उद्देश्य एक ऐसा अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाओं को आजीविका योजनाओं, रियायती ऋण और बाजार से जुड़े अवसरों से जोड़े, ताकि वे 1 लाख रुपये से अधिक की स्थायी वार्षिक घरेलू आय प्राप्त करने में सक्षम बन सकें।

इस पहल के तहत अगले तीन सालों में 1.1 लाख संभावित लखपति दीदियों को सहायता देने का अनुमान है। इससे उन्हें कैश ट्रांसफर, रियायती दरों पर पशुधन जैसी उत्पादक परिसंपत्तियां हासिल करने जैसी सुविधाएं मिलेंगी और सुनियोजित कौशल विकास के अवसरों तक बेहतर पहुंच प्राप्त हो सकेगी।
लखपति दीदी योजना एक राष्ट्रीय पहल है जिसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं को पशुपालन, मछली पालन, डेयरी विकास और महिला विकास जैसे क्षेत्रों की सरकारी योजनाओं से जोड़ना और उन्हें सशक्त बनाना है। कौशल विकास, वित्त तक पहुंच और उद्यम के लिए समर्थन प्रदान करके, यह कार्यक्रम महिलाओं को आय के स्थायी स्रोत वाली आजीविका बनाने में मदद करता है।
इस पहल के बारे में बात करते हुए, पेप्सिको इंडिया और दक्षिण एशिया की मुख्य कॉर्पोरेट मामलों की अधिकारी और सस्टेनेबिलिटी हेड, यशिका सिंह ने कहा, “पेप्सिको इंडिया में, हम मानते हैं कि रिवोल्यूशनारी पहल के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने से परिवारों और समुदायों में व्यापक प्रभाव पड़ता है।” एचएसआरएलएम और इंडस एक्शन के साथ इस साझेदारी के ज़रिये, हम आजीविका योजनाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने वाली प्रणालियों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। संस्थागत सहयोग, तकनीक के उपयोग और समुदाय-आधारित पहुंच को एक साथ लाकर, हमारा लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को स्थायी आय के तरीके अपनाने और अपने समुदायों में लीडर के रूप में उभरने में सक्षम बनाना है। यह पहल समावेशी विकास और दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव के प्रति हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) के सीईओ सूरज भान ने कहा, “लखपति दीदी पहल सामूहिक उद्यम और उद्यमिता का समर्थन करके ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के अवसरों को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। डिजिटल योजना पात्रता मिलान इंजन का उपयोग करके, हम पात्र स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) महिलाओं की पहचान करके उन्हें संबंधित सरकारी ऋण और आजीविका योजनाओं से जोड़ सकते हैं। इससे हमें लाभार्थियों तक अधिक सक्रियता के साथ पहुंचने और आजीविका के अवसरों तक उनकी पहुंच में सुधार करने में मदद मिली है।”

इंडस एक्शन के संस्थापक और सीईओ तरुण चेरुकुरी ने कहा, “पेप्सिको इंडिया और एचएसआरएलएम के साथ साझेदारी समुदाय के एकदम अंतिम छोर पर खड़ी महिलाओं तक पहुंच को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि महिलाएं लखपति दीदी योजना के तहत सोचे गए अवसरों का पूर्ण लाभ उठा सकें। संस्थागत तालमेल, डेटा-आधारित सिस्टम डिजाइन और सामुदायिक सहभागिता मिलकर योजना तक पहुंच को महिलाओं की व्यक्तिगत पात्रता और आकांक्षाओं के अनुरूप बनाने में मदद कर रहे हैं, साथ ही शिकायत निवारण और निगरानी तंत्र को भी मजबूत दे रहे हैं। साथ मिलकर, यह दृष्टिकोण सार्वजनिक कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाता है, साथ ही जवाबदेही के साथ कार्यान्वयन को भी सक्षम बनाता है।”
यह कार्यक्रम महिलाओं के नेतृत्व वाले आर्थिक सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत आधार देता है। इसके प्रभाव को अधिक से अधिक करने के लिए, संस्थागत तालमेल को मजबूत करने, पहुंच के रास्तों को सरल बनाने और उत्तरदायी सहायता प्रणालियों को विकसित करने का अवसर है। 100 से अधिक हितधारकों को शामिल करके एक मूल्यांकन में योजना कार्यान्वयन को और मजबूत करने के लिए प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई। इनमें अंतर-विभागीय तालमेल में सुधार, ऋण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, मजबूत बाजार संपर्क, अधिक व्यक्तिगत प्रशिक्षण मार्ग और संरचित शिकायत निवारण तंत्र शामिल हैं। इन जानकारियों के आधार पर, पेप्सिको इंडिया, एचएसआरएलएम के सहयोग से नीचे लिखे बिंदुओं पर आधारित एक व्यापक रणनीति को आगे बढ़ा रहा है और इंडस एक्शन इसे कार्यान्वित कर रहा है:
• संस्थागत सम्मिलन: स्वयं सहायता समूहों, संबंधित विभागों, कौशल विकास साझेदारों, वित्तीय संस्थानों और बाजार के हितधारकों के बीच संरचित संबंध स्थापित करना, जो स्पष्ट रूप से परिभाषित मानक संचालन प्रक्रियाओं द्वारा समर्थित हो।
• प्रक्रिया सरलीकरण: पहुँच में सुधार के लिए विभागों और वित्तीय संस्थानों में योजना और ऋण आवेदन प्रक्रियाओं का मानकीकरण करना।
• प्रौद्योगिकी एकीकरण: महिलाओं के कौशल, आकांक्षाओं और पात्रता मानदंडों के साथ आजीविका के अवसरों का तालमेल बैठाने के लिए योजना-मिलान पात्रता इंजन का इस्तेमाल करना।
• प्रगति की डिजिटल ट्रैकिंग: आवेदन प्रक्रियाओं को ट्रैक करने, योजना तक पहुंच की निगरानी करने और डेटा-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए एक पोर्टल बनाना।
• शिकायत निवारण तंत्र: लाभार्थियों की चिंताओं को रिपोर्ट करने, उनकी ट्रैकिंग और समाधान के लिए एक ढांचागत प्रणाली स्थापित करना।

“लखपति दीदी योजना से आय भी बढ़ रही है, खर्चा भी कर पा रहे हैं। बच्चे पढ़ा पाये, अब दोनों बच्चियां अपनी नौकरी पे लगी हैं”
सरोज, शंकर महिला स्वयं सहायता समूह, गुरूग्राम
योजनाएं: वीटा + पीएमएफएमई

“”नि:शुल्क प्रशिक्षण प्राप्त किया और लोन लेकर अपने पापड़, अचार, लड्डू का काम बढ़ाया। अच्छा महसूस होता है, एक मोटिवेशन आता है कि अपने पैरों पर खड़े हैं और किसी से मांगने की जरूरत नहीं होती, वर्ना पति, सास-ससुर से मांगते रहते। अब मेरे बच्चों को कोई भी सामान चाहिए होता है तो पापा की जगह मुझसे मांगते हैं। अब आत्मनिर्भर हो गई हूँ।”
मंजीत, नारीशक्ति स्वयं सहायता समूह, गुरूग्राम
योजनाएं: पशुपालन + व्यक्तिगत ऋण योजना

योजनाओं तक पहुंच को सुगम बनाने के अलावा, इस साझेदारी का उद्देश्य महिलाओं मे वित्तीय फैसले लेने का हुनर निखारना, बाजार तक उनकी पहुंच बढ़ाना है। साथ ही एक ऐसा मॉडल तैयार करना है जिसे महिला नेतृत्व वाले आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके। इसे बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए, यह पहल जिला और ब्लॉक स्तर पर अभिसरण प्लेटफार्मों का उपयोग करेगी, कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन और तकनीक-आधारित चैनलों जैसे कि आईवीआर, एसएमएस और कॉल सेंटर का उपयोग करके अंतिम छोर तक निरंतर और व्यक्तिगत जुड़ाव सुनिश्चित करेगी। इस सहयोग के जरिये, पेप्सिको इंडिया लगातार यह दिखा रहा है कि उद्देश्य-आधारित साझेदारियां सार्वजनिक प्रणालियों को किस तरह मजबूत कर सकती हैं। आर्थिक अवसरों का विस्तार कर सकती हैं और लचीले एवं सशक्त समुदायों के निर्माण में मदद कर सकती हैं।

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