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लक्ष्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि देश में खेल व्यवस्था को जमीनी स्तर से बदलना है : लिएंडर पेस

नयी दिल्ली :पूर्व दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि देश में खेल व्यवस्था को जमीनी स्तर से बदलना है।
हाल ही में राजनीति में आए ओलंपिक पदक विजेता लिएंडर पेस ने एनडीटीवी इग्नाइट समिट में कहा कि अपने दिवंगत पिता के सपने को पूरा करने के लिए वो राजनीति में आए हैं। उनका लक्ष्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि देश में खेल व्यवस्था को जमीनी स्तर से बदलना है। पेस ने देश के स्पोर्ट्स स्ट्रक्चर और राजनीतिक व्यवस्था को लेकर अपना बड़ा विजन साझा किया। पेस ने खेलों में स्पोर्ट्स साइंस के इस्तेमाल, बीजेपी में शामिल होने की वजह और बंगाल को लेकर प्राथमिकताओं पर खुलकर बात की। 18 ग्रैंड स्लैम खिताब विजेता ने कहा कि वो अपने दिवंगत पिता के सपने को पूरा करने के लिए राजनीति में आए हैं, जिसका लक्ष्य खेल विज्ञान के जरिए देश के 50 करोड़ बच्चों को सशक्त बनाना है।

राजनीति के लिए बीजेपी क्यों चुना?
राजनीति में कदम रखने और बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर लिएंडर पेस ने कहा,”मैं एक डबल्स खिलाड़ी रहा हूं और टीम बनाने पर भरोसा रखता हूं। भारतीय राजनीति में मैंने नरेंद्र मोदी और अमित शाह से बेहतर कोई डबल्स टीम नहीं देखी। दोनों के बीच एक विशेष तालमेल और भरोसा है।” उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि देश में खेल व्यवस्था को जमीनी स्तर से बदलना है। उन्होंने कहा कि अपने करियर में 18 ग्रैंड स्लैम और सात ओलंपिक खेलने के बावजूद वह आराम कर सकते थे, लेकिन उनके पिता के दो बड़े सपने, ‘भारत के 50 करोड़ बच्चों को खेल से जोड़ना और खेल शिक्षा को मजबूत करना’ ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया।

राजनीति में रहकर खेल के लिए क्या करेंगे?
पेस ने खेल को लेकर अभी के तरीकों को पुराना बताते हुए खेलों में साइंटिफिक अप्रोच अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने एक दिलचस्प साइंटिफिक फैक्ट साझा करते हुए बताया कि बाएं हाथ के खिलाड़ियों की बाईं कलाई दाईं कलाई से 0.3 मिमी लंबी होती है, जिससे उन्हें बायोमैकेनिकल लाभ मिलता है। जॉन मैकेनरॉ और गोरान इवानिसेविच जैसे दिग्गजों की सफलता का ये बड़ा कारण था।
उन्होंने कहा कि खेलों के विकास के लिए राज्यों और केंद्र का एक साथ आना बेहद जरूरी है। खेल वर्तमान में राज्यों का विषय है और वर्तमान पीटी क्लासेस का तरीका बहुत पुराना हो चुका है। इस व्यवस्था को बदलने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल यानी “डबल इंजन” सरकार की जरूरत है।

पेस का भारतीय खेल और टेनिस को बदलने का ब्लूप्रिंट
स्पोर्ट्स साइंस (खेल विज्ञान): पेस ने ‘पश्चिमी तकनीक और पूर्वी दर्शन’ के मेल से वैज्ञानिक तरीके से प्रतिभाओं को खोजने (जैसे- जेनेटिक, बोन डेंसिटी और मसल डेंसिटी टेस्ट) पर जोर दिया।
सिस्टम में सुधार: बंगाल टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में अपने प्लान का खुलासा करते हुए पेस ने कहा कि उनका लक्ष्य राज्य संघों का ऑडिट करना, अंतरराष्ट्रीय कोचिंग लाना और ‘खेलो इंडिया’ के जरिए ग्रामीण प्रतिभाओं को तलाशना है।
जमीनी स्तर पर सफलता: उन्होंने ओडिशा के कलिंगा इंस्टीट्यूट के साथ अपने काम का जिक्र किया, जहां वर्तमान में 1 लाख बच्चे ट्रेनिंग ले रहे हैं। इस संस्थान ने अब तक 24 ओलंपियन और 17 पैरालंपियन दिए हैं।
वहीं पश्चिम बंगाल की राजनीति और वहां जमीनी बदलावों पर बात करते हुए पेस ने कहा कि खेल से इतर राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। बंगाल के आर्थिक पिछड़ेपन पर चिंता जताते हुए पेस ने कहा, “हमें बंगाल में टाटा और महिंद्रा जैसे बड़े उद्योगों को वापस लाना होगा। हमारा लक्ष्य ऐसा माहौल बनाना है जिससे युवा उद्यमियों को रोजगार और बिजनेस के लिए मुंबई, दिल्ली या बेंगलुरु न भागना पड़े. बंगाल को फिर से देश का शीर्ष राज्य बनाना हमारा संकल्प है। ”

महेश भूपति से रिश्ते और सिंगल्स नहीं खेलने का फैसला
‘टेनिस प्लेयर महेश भूपति से रिश्ते और सिंगल्स नहीं खेलने के फैसले’ के सवाल पर पेस ने भावुक होते हुए कहा, “हम आज भी दोस्त हैं. काश उस समय मुझमें इतनी समझ होती कि मैं बाहरी लोगों के दखल को रोक पाता, तो शायद हमारी जोड़ी खेल इतिहास की सबसे महान जोड़ी होती।”
पीट सम्प्रास के खिलाफ 4-0 का अपराजेय रिकॉर्ड रखने वाले पेस से जब पूछा गया कि क्या उन्हें सिंगल्स करियर को आगे नहीं बढ़ाने का मलाल है? इस पर पेस ने कहा कि मैंने देश को ग्रैंड स्लैम चैंपियन बनाने के लिए अपने सिंगल्स करियर का त्याग किया। मेरे लिए तिरंगा हमेशा खुद से ऊपर रहा है।

भारत में ओलंपिक का सपना
क्रिकेट की तारीफ करते हुए पेस ने कहा कि वे टेस्ट क्रिकेट के दीवाने हैं, लेकिन आईपीएल (आईपीएल) के मैनेजमेंट ने देश को इतनी प्रतिभाएं दी हैं कि आज भारत आसानी से तीन वर्ल्ड कप टीमें उतार सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के नेतृत्व में उनका सबसे बड़ा सपना ओलंपिक खेलों की मेजबानी भारत को दिलाना है, ताकि वे भारतीय खिलाड़ियों को अपनी धरती पर मेडल जीतते हुए देख सकें।

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