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पुरुष और प्रोस्टेट ग्रंथि: जागरूकता क्यों है जरूरी

हल्द्वानी। प्रोस्टेट एक छोटी, अखरोट के आकार की ग्रंथि है जो केवल पुरुषों में पाई जाती है। यह मूत्राशय (ब्लैडर) के ठीक नीचे स्थित होती है और मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा) को घेरे रहती है, जो शरीर से मूत्र बाहर निकालने का कार्य करता है। आकार में छोटी होने के बावजूद, प्रोस्टेट पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि यह ऐसा द्रव बनाती है जो शुक्राणुओं को पोषण और सुरक्षा प्रदान करता है। डॉ. अमित सिंह मल्होत्रा, एसोसिएट डायरेक्टर यूरोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांट एवं रोबोटिक सर्जरी, मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत, दिल्ली के अनुसार, बढ़ती उम्र के साथ प्रोस्टेट में बदलाव होना सामान्य बात है। 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं सबसे आम स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हैं। प्रोस्टेट के बारे में जानकारी और इसके रोगों के शुरुआती लक्षणों की पहचान पुरुषों को समय पर चिकित्सा सहायता लेने और बेहतर जीवन गुणवत्ता बनाए रखने में मदद कर सकती है।
प्रोस्टेट से जुड़ी सबसे सामान्य समस्याओं में से एक है बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच), जिसे प्रोस्टेट का बढ़ना भी कहा जाता है। यह एक गैर-कैंसरकारी स्थिति है जो उम्र बढ़ने के साथ अधिक सामान्य हो जाती है। बढ़ा हुआ प्रोस्टेट मूत्रमार्ग पर दबाव डाल सकता है और सामान्य रूप से पेशाब करने में बाधा उत्पन्न कर सकता है। इसके कारण पेशाब की धार कमजोर होना, पेशाब शुरू करने में कठिनाई, बार-बार पेशाब आना (विशेषकर रात में), अचानक पेशाब की तीव्र इच्छा होना या मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का एहसास जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण समस्या है प्रोस्टेटाइटिस, जो प्रोस्टेट में सूजन या संक्रमण के कारण होती है। यह समस्या युवा और वृद्ध दोनों प्रकार के पुरुषों को प्रभावित कर सकती है। इसके लक्षणों में पेल्विक क्षेत्र में दर्द या असहजता, पेशाब के दौरान दर्द, बुखार तथा स्खलन के समय दर्द शामिल हो सकते हैं। अधिकांश मामलों में उचित चिकित्सा उपचार से इसका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है।
प्रोस्टेट कैंसर दुनिया भर में पुरुषों में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है। प्रारंभिक अवस्था में प्रोस्टेट कैंसर अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता, इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले पुरुषों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जब लक्षण दिखाई देते हैं, तो वे प्रोस्टेट बढ़ने के लक्षणों जैसे ही हो सकते हैं, जिनमें पेशाब संबंधी समस्याएं या मूत्र में रक्त आना शामिल है। समय रहते पहचान होने पर उपचार के परिणाम काफी बेहतर होते हैं।
यदि किसी पुरुष को लगातार पेशाब संबंधी समस्याएं, मूत्र में रक्त, पेल्विक क्षेत्र में दर्द या बिना कारण वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। जांच के दौरान शारीरिक परीक्षण, प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) टेस्ट, यूरिन टेस्ट, इमेजिंग जांच या अन्य आवश्यक परीक्षण किए जा सकते हैं।
बढ़े हुए प्रोस्टेट और प्रोस्टेट कैंसर दोनों के लिए सर्जिकल उपचार में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और अब अधिकांश प्रक्रियाएं मिनिमली इनवेसिव तकनीकों से की जाती हैं। बढ़े हुए प्रोस्टेट के उपचार के लिए अक्सर बिना किसी बाहरी चीरे के प्राकृतिक मूत्रमार्ग के रास्ते से सर्जरी की जाती है, जबकि प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी रोबोटिक-असिस्टेड तकनीक से संभव है। इन आधुनिक तकनीकों से दर्द कम होता है, अस्पताल में कम समय रहना पड़ता है और मरीज तेजी से स्वस्थ होकर कुछ ही हफ्तों में सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से भी प्रोस्टेट स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। नियमित व्यायाम, फल और सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार, स्वस्थ वजन बनाए रखना, तंबाकू से दूरी रखना तथा मधुमेह जैसी पुरानी बीमारियों को नियंत्रित रखना समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

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