उत्तराखण्डधर्मराज्य

पूर्ण गुरु के मार्गदर्शन से ही संभव है आत्मिक उन्नति: भारती

कहा, ब्रह्मज्ञान से प्रारंभ होता है वास्तविक आध्यात्मिक जीवन

देहरादून। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित देवदुर्लभ श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव बुधवार को मथुरा फार्म, तुनवाला, रायपुर (देहरादून) में श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर सद्गुरु के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त की तथा गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व भक्तिभाव से मनाया।


कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं वेद पाठियों द्वारा रुद्री पाठ और आरती के साथ हुआ। इसके उपरांत भजन-कीर्तन, आध्यात्मिक प्रवचन तथा भक्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नाट्य मंचन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम में आदि गुरु शंकराचार्य जी की दिव्य लीलाओं पर आधारित नाट्य प्रस्तुति भी की गई, जिसने गुरु-शिष्य परंपरा एवं सनातन संस्कृति के आदर्शों को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया।


साध्वी विदुषी जाह्नवी भारती ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि पूर्ण सद्गुरु ही ब्रह्मज्ञान की दिव्य दीक्षा प्रदान कर मनुष्य के अंतर्मन में ज्ञान का प्रकाश प्रज्वलित करते हैं और उसे आत्मिक जागृति का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला यह पर्व गुरु-शिष्य परंपरा की सनातन संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से गुरु की शिक्षाओं को जीवन में अपनाकर प्रेम, सेवा, सदाचार, मानवता तथा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को आत्मसात करते हुए विश्व शांति एवं मानव कल्याण के लिए कार्य करने का आह्वान किया।


साध्वी विदुषी अदिति भारती ने अपने सत्संग में गुरु-शिष्य परंपरा, ब्रह्मज्ञान तथा गुरु कृपा की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए पूर्ण गुरु का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वेदों, पुराणों और उपनिषदों में गुरु को ईश्वर तक पहुंचने का सच्चा मार्गदर्शक बताया गया है तथा ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही मनुष्य का वास्तविक आध्यात्मिक जीवन प्रारंभ होता है। उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा का पर्व महर्षि वेदव्यास की स्मृति में व्यास पूजा के रूप में भी मनाया जाता है, जो भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की महान विरासत का प्रतीक है।
इस अवसर पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक दिव्य गुरु आशुतोष महाराज की दिव्य शिक्षाओं का स्मरण करते हुए कहा गया कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूजनीय माना गया है। जिसका उद्देश्य ब्रह्मज्ञान, आध्यात्मिक जागरण, मानव कल्याण तथा विश्व शांति का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।
भक्ति, आध्यात्मिक ऊर्जा और गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा से ओत-प्रोत इस महोत्सव में श्रद्धालुओं ने सद्गुरु का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य बताया। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।

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