विश्व विख्यात विरासत महोत्सव का शुभारंभ 23 अक्टूबर से, इस बार नींबू वाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में हो रहा है आयोजित

देहरादून: रिच संस्था प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी बहुत ही आकर्षक एवं बेहतरीन पैमाने पर शाही सांस्कृतिक लोक कलाकारों को लेकर विरासत आर्ट और हेरिटेज फेस्टिवल 2026 का भव्यतम आयोजन करने जा रही है I संस्था के संस्थापक आरके सिंह ने कहा है कि विरासत को हम इंटरनेशनल लेवल पर निश्चित रूप से ले जाएंगे I संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष आरके सिंह ने आज यहां राजपुर रोड स्थित एक होटल में मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि इस बार विरासत महोत्सव का भव्य आयोजन स्थानीय नींबू वाला में हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में किया जा रहा है, ताकि यहां पर एक बेहतरीन अनुभव के साथ पारंपरिक नए रूप में “विरासत महोत्सव” का आगाज हो सके, साथ ही यातायात की समस्या एवं शाही मेहमानों के आगमन पर उनको कोई भी असुविधा न हो सकेI आरके सिंह ने बताया कि हेरिटेज कला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत के प्रेमियों के लिए ‘रिच’ विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल 2026’ इस वर्ष एक नए, भव्य और विशाल परिसर में आयोजित होने जा रहा है। यह महोत्सव 23 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ होकर 6 नवंबर 2026 तक चलेगा । इस वर्ष महोत्सव का आयोजन दून के निंबूवाला स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर में किया जाएगा I उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास यह है की विरासत को हम इंटरनेशनल स्तर पर लेकर जाएं और इस प्रयास में हम निश्चित रूप से अतिशीघ्र सफलही होंगे I उन्होंने कहा कि इस ऑडिटोरियम में 29 कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, साथ ही थिएटर फेस्टिवल भी हम शुरू करने जा रहे हैं I आरके सिंह ने यह भी कहा कि हमारी कोशिश यह है कि इस नए आयोजन स्थल पर विरासत के शाही मेहमान चार्टर प्लेन लैंड करके सीधे कार्यक्रम में शिरकत कर सकें I उन्होंने कहा कि महोत्सव का शुभारंभ छोलिया नृत्य और उप्रेती बहनों की लोक संगीत प्रस्तुति के साथ होगा। उद्घाटन समारोह में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति भी होगी, जिसमें सुप्रसिद्ध ठुमरी गायक पंडित साजन मिश्रा और स्वरांश मिश्रा अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। ये दोनों कलाकार पूर्व में भी कई बार विरासत के मंच की शोभा बढ़ा चुके हैं।15 दिवसीय महोत्सव का समापन 6 नवंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त गायिका ऊषा उत्थुप की शानदार प्रस्तुति के साथ होगा। 15 दिनों तक देहरादून के नागरिकों को भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगीत, नृत्य, कला और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा। यह महोत्सव सदैव उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए जाना जाता रहा है। महोत्सव में खरीदारी के शौकीनों के लिए भी आकर्षक अवसर उपलब्ध होंगे। यहाँ पारंपरिक परिधानों, भारत एवं विदेशों से लाए गए उत्कृष्ट सूखे मेवों, मुलायम ऊनी गद्दों, लकड़ी की नक्काशी से बनी वस्तुओं, धातु शिल्प, रजाइयों, आकर्षक फर्नीचर तथा सैकड़ों अन्य उपयोगी और कलात्मक उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला देखने और खरीदने को मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष हिमालयन कल्चरल सेंटर के विशाल परिसर में आयोजित होने वाला विरासत महोत्सव दर्शकों को खरीदारी के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय लोक कलाओं का आनंद लेने का अनूठा अनुभव प्रदान करेगा। विरासत विलेज और एम्फीथिएटर में विभिन्न लोक प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएँगी। लोक कला एवं पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ : महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण लोक नाट्य प्रस्तुति ‘चक्रव्यूह’ होगा। इसके साथ ही उत्तराखंड की विविध लोक परंपराओं और लोक कलाओं का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा। कार्यक्रम में स्पर्श ट्राइबल सोशल ऑर्गनाइजेशन के कलाकारों द्वारा जौनसारी लोक नृत्य प्रस्तुत किए जाएँगे। जौनसार बावर लोक सुर संगम तथा जौनसार बावर सांस्कृतिक हिलोयात रंगमंच द्वारा लोक नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी। आस सोशल एंड कल्चर सोसाइटी द्वारा कुमाऊँनी लोक संगीत एवं नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा कोटद्वार की सरिता बनोला गढ़वाली लोक नृत्यों की प्रस्तुति देंगी। महिला जागृति समिति द्वारा गढ़वाली संगीत एवं नृत्य प्रस्तुत किए जाएँगे। इसके अतिरिक्त पांडवानी लोक कला मंच द्वारा लोक प्रस्तुतियाँ तथा सुनिधि द्वारा कुमाऊँनी लोक कला का प्रदर्शन किया जाएगा।
उन्होंने पत्रकारों को जानकारी देते हुए यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत श्रीलंका से आए एक अंतरराष्ट्रीय लोक कला दल की विशेष प्रस्तुति होगी। इसके साथ ही कजाकिस्तान के कलाकार भी अपनी संगीतमय प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं सुगम संगीत की प्रस्तुतियाँ के तहत महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देश-विदेश के प्रतिष्ठित कलाकारों की विविध प्रस्तुतियाँ शामिल होंगी। जबकि युवा वायलिन वादक रागिनी शंकर वायलिन वादन प्रस्तुत करेंगी। स्मित तिवारी सरोद वादन, आइवी बनर्जी ठुमरी गायन और अश्विन श्रीनिवासन बाँसुरी वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। ध्रुव बेदी और समन्वय सरकार सितार वादन प्रस्तुत करेंगे। प्रियंका बर्वे ग़ज़ल गायन करेंगी, जबकि सिद्धार्थ बेलमन्नू अपनी गायकी से दर्शकों को आनंदित करेंगे।
शिंजिनी कुलकर्णी कथक नृत्य प्रस्तुत करेंगी। आरोही मुंशी, वाणी माधव और मौमाला नायक क्रमशः भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक नृत्य की प्रस्तुतियाँ देंगी। काफी दिलचस्प एवं बेहतरीन आकर्षक का केंद्र हमेशा ही बने रहने वाले इस विरासत महोत्सव में इस बार राजेश वैद्य और रमणा बालचंद्रन वीणा वादन प्रस्तुत करेंगे। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की दिग्गज गायिका बेगम परवीन सुल्ताना अपनी प्रस्तुति देंगी। कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठित गायक टीएम कृष्णा तथा प्रख्यात वायलिन वादक डॉ. एन राजम भी महोत्सव की शोभा बढ़ाएँगे। इसके अतिरिक्त सूफी एवं आध्यात्मिक संगीत के लोकप्रिय कलाकार ओसमान मीर, प्रसिद्ध भारतीय बैंड ‘इंडियन ओशन’ तथा हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन के कलाकार अनोल चटर्जी, महेश काले और राहुल देशपांडे अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे। गया अंग शैली के ठुमरी गायन की प्रस्तुति राजन साजूवर द्वारा दी जाएगी। प्रसिद्ध गायक जसबीर जस्सी द्वारा राजा रणधीर सिंह के सम्मान में एक विशेष संगीतमय श्रद्धांजलि प्रस्तुत की जाएगी। भारतीय और पश्चिमी संगीत के अनूठे संगम पर आधारित एक विशेष संध्या भी आयोजित होगी। इस कार्यक्रम में प्रख्यात वायलिन वादक कुमारेश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध सैक्सोफोन वादक जॉर्ज ब्रूक्स एक साथ प्रस्तुति देंगे I इनमें ‘बहार-ए-लखनऊ’, पंडित कृष्ण मोहन जी द्वारा प्रस्तुत नृत्य कार्यक्रम; ‘चाँदनी महफ़िल’, जिसमें मंजरी चतुर्वेदी तवायफों के इतिहास और उनकी सांस्कृतिक विरासत की कथा प्रस्तुत करेंगी; तथा ‘तवायफनामा – एक यात्रा’ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ग्रामोफोन के 125 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में गौहर जान की स्मृति को समर्पित एक विशेष कार्यक्रम ‘द परफॉर्मिंग आर्ट्स ट्राइब’ द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।
साहित्य महोत्सव: विचार, विमर्श और सृजन का संगम: विरासत महोत्सव में साहित्य प्रेमियों के लिए एक समृद्ध साहित्यिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रतिष्ठित लेखक, कवि, वक्ता और साहित्य जगत की प्रमुख हस्तियाँ भाग लेंगी।
यही नहीं, देहरादून की जानी-मानी साहित्यिक हस्तियों में संजीव चोपड़ा, बुद्धिनाथ मिश्र, राजकुमार पंवार, मनोज भार्थवाल, अंबर खर्बंदा, भारती मिश्रा, सोमेश्वर पांडेय, इंद्रजीत सिंह, गंधर्व गोपाल जोशी और सचिन चौहान शामिल होंगे। महोत्सव के अंतर्गत एक विशेष साहित्यिक एवं अपराध साहित्य महोत्सव भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न लेखक अपने विचार साझा करेंगे तथा साहित्य और अपराध विषयक लेखन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। दास्तानगोई, मुशायरा एवं कवि सम्मेलन : महोत्सव में दास्तानगोई की विशिष्ट परंपरा को भी मंच प्रदान किया जाएगा। आस्था शुक्ला, तसनीम सुंद और सैयद साहिल आगा अपनी अनूठी कहानी-वाचन प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रोताओं को इस पारंपरिक कला से परिचित कराएँगे। एक भव्य मुशायरे में शीन काफ़ निज़ाम, मदन मोहन दानिश, राजेश रेड्डी, इक़बाल अशहर, अज़हर इक़बाल, मुकेश आलम और मुज़फ्फर अब्दाली जैसे प्रतिष्ठित शायर एवं उर्दू साहित्य की प्रमुख हस्तियाँ शिरकत करेंगी। हिंदी कविता प्रेमियों के लिए कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें अरुण शर्मा, प्रदीप मायूस, रमेश चंद्र, रजनी चौहान और निखिल चौहान अपनी कविताओं से श्रोताओं को आनंदित करेंगे।विरासत महोत्सव में स्कूली विद्यार्थियों के लिए अनेक शैक्षिक और रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी। इनका उद्देश्य बच्चों को कला, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प से परिचित कराना तथा उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है।
‘शिल्प ट्रेजर हंट’: पारंपरिक हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत भी मुख्य आयोजनों में शामिल है I विरासत हेरिटेज क्विज़: विकास एवं उत्थान समिति द्वारा आयोजित स्कूली विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक प्रश्नोत्तरी भी होगा I विरासत साधना के अंतर्गत देहरादून के विद्यार्थियों द्वारा शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियाँ की जाएंगी I ये सभी कार्यक्रम महोत्सव के दौरान विभिन्न तिथियों पर अलग-अलग मंचों पर आयोजित किए जाएँगे। विंटेज कार एवं मोटरसाइकिल रैली, सुपरबाइक रैली तथा उत्तराखंड की पर्यावरण संबंधी लोक-नाट्य प्रस्तुति भी विरासत में मुख्य आकर्षण रहेंगे I उन्होंने यह भी कहा कि‘विरासत कला एवं धरोहर महोत्सव 2026’ देहरादून में 15 दिनों तक कला, संगीत, साहित्य, नृत्य और सांस्कृतिक विविधता के जीवंत उत्सव का वादा करता है। यह आयोजन उत्तराखंड की समृद्ध विरासत को सम्मानित करने के साथ-साथ देश-विदेश की सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा। इस पत्रकार वार्ता में रिच संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष आरके सिंह के साथ मुख्य रूप से रिच संस्था की संयुक्त सचिव विजयश्री जोशी, विरासत महोत्सव के निदेशक लोकेश ओहरी, प्रियंदा अय्यर, रिच के सदस्य आशुतोष, समीर सिन्हा वन विभाग उत्तराखंड, ओएनजीसी के हेड एचआर नीरज शर्मा भी उपस्थित रहे I




