उत्तराखण्डराज्य
ऐंसू बसंत कुछ खास हो…

ऐंसू बसंत कुछ खास हो,
पहाड़ पर विश्वास हो
बगुला ब्यलर कू औजास न हो
डोखरी पुंगड़ियो म देशी घास न हो ।
ऐंसु बसंत कुछ खास हो
खूब हंसु खित खीत बुरांस
ज्वानी पानी का तरास न हो
कुई भी पलायन कू दास न हो ।
ऐंसु बसंत कुछ खास हो
हंसती मुखड़ी कुई उदास न हो
छोटों तै बड़ा बुजुर्ग बरदास हो
देव भूमि का घरू घरू देवतो कू बास हो ।
ऐंसू बसंत कुछ खास हो,
सतबुधी हर गौ हर मवास हो
बेरोजगारी कू हरास हो
अपंडी बोली भाषा की मिठास हो
ऐंसु बसंत कुछ खास हो
अपड़ू पहनावा अपड़ू लिबास हो
हंसदी फ्योली घुघुति पास हो
पहाड़ी स्वाभिमान बचौड़ का प्रयास हो ।
ऐंसु बसंत कुछ खास हो
हरि भरी सारी भविष्य की आस हो
उखड़ी नेतागिरी तेरू सत्त्यानास हो
अपड़ू पाड़ पहाड़ियों का पास हो
_______राकेश__!




