ग्वालदम–तपोवन सड़क बीआरओ को सौंपने की मांग तेज, नवंबर से आंदोलन की चेतावनी

चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )
सामरिक दृष्टि, साहसिक पर्यटन और तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रस्तावित ग्वालदम –नंदकेशरी–देवाल–वांण–तपोवन मोटर मार्ग को लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को हस्तांतरित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। सड़क हस्तांतरण में देरी से नाराज पिंडर घाटी के लोगों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं, आगामी नवंबर माह से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी के बाद क्षेत्र में जनआंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पिंडर घाटी के साथ ही नंदानगर घाट विकासखंड के विकास के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस सड़क मार्ग को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ रही है। ज्ञापन सौंपे जाने और सोशल मीडिया पर चल रही बयानबाजी से भी इस मुद्दे पर लोगों की नाराजगी सामने आ रही है।
भारत-तिब्बत सीमा से जुड़े धारचूला (कुमाऊं) और जोशीमठ (गढ़वाल) क्षेत्रों तक सैन्य आवाजाही को सुगम बनाने के उद्देश्य से रक्षा मंत्रालय ने ग्वालदम–नंदकेशरी–वांण–तपोवन सड़क का विस्तृत सर्वेक्षण कराया था। सर्वेक्षण के अनुसार, प्रस्तावित मार्ग वर्तमान रास्ते की तुलना में करीब 60 किलोमीटर छोटा बताया गया। इस सड़क के निर्माण से सैन्य वाहनों और साजो-सामान को कम समय में सीमा क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसी सामरिक महत्व को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने अक्टूबर 2024 में सड़क परियोजना के लिए करीब 936 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान करते हुए निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी बीआरओ को सौंपी थी। योजना के तहत ग्वालदम से वांण तक करीब 60 किलोमीटर मौजूदा सड़क लोक निर्माण विभाग से बीआरओ को हस्तांतरित की जानी थी, जबकि वांण से तपोवन तक करीब 29 किलोमीटर सड़क का नए सिरे से निर्माण बीआरओ को करना था।
वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने रक्षा मंत्रालय से अनुरोध किया था कि वर्ष 2026 में प्रस्तावित श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को देखते हुए ग्वालदम से वांण तक की सड़क को यात्रा संपन्न होने तक लोक निर्माण विभाग, थराली खंड के पास ही रखा जाए। राज्य सरकार के इस अनुरोध पर रक्षा मंत्रालय ने सहमति दे दी थी।
हालांकि, सड़क को तत्काल बीआरओ को सौंपने की मांग कर रहे क्षेत्रीय लोगों ने इस निर्णय का विरोध किया। इसके बाद 7 दिसंबर 2025 को देवाल के सवाड़ गांव में आयोजित अमर शहीद सैनिक मेले के मंच से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि वर्ष 2026 में राजजात यात्रा संपन्न होने के बाद ग्वालदम–वांण मोटर मार्ग को लोक निर्माण विभाग से बीआरओ को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। इस वर्ष प्रस्तावित नंदादेवी राजजात यात्रा आयोजित नहीं हो सकी, जबकि सितंबर माह में श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा संपन्न हुई। इसके बावजूद सड़क हस्तांतरण की दिशा में राज्य सरकार के स्तर पर कोई स्पष्ट प्रगति सामने नहीं आने से क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी बढ़ने लगी है।
ग्वालदम–तपोवन मोटर मार्ग को बीआरओ को हस्तांतरित करने की मांग को लेकर एक शिष्टमंडल ने थराली के उपजिलाधिकारी यदुवीर सिंह रावत से मुलाकात की। शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपते हुए सड़क को तत्काल बीआरओ के सुपुर्द करने की मांग उठाई। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि सड़क हस्तांतरण की मांग पूरी नहीं की गई तो आगामी नवंबर माह से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ज्ञापन पर ग्वालदम– नंदकेशरी –देवाल–वांण–तपोवन सड़क संघर्ष समिति, देवाल के संयोजक महावीर बिष्ट, देवाल के ज्येष्ठ प्रमुख दीपक गड़िया, किशोर घुनियाल, गौरव खत्री, लखपत परिहार, मनोज पाल, दर्शन, यशवंत सिंह और गंगा सिंह सहित अन्य लोगों के हस्ताक्षर हैं। सड़क को बीआरओ को सौंपने की मांग को लेकर अब आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में देवाल विकासखंड में चुनाव बहिष्कार की चेतावनी भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है। वायरल संदेशों में सड़क हस्तांतरण की मांग पूरी नहीं होने पर चुनाव बहिष्कार की बात कही जा रही है। सोशल मीडिया पर कई लोग इन संदेशों के समर्थन में अपनी प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं।
सड़क संघर्ष समिति के संयोजक महावीर बिष्ट ने बताया कि सड़क हस्तांतरण की मांग को लेकर आगे की रणनीति तय करने के लिए आगामी 26 अक्टूबर को विकासखंड मुख्यालय देवाल में समिति के संयोजक मंडल की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में आंदोलन की रूपरेखा और आगे की कार्ययोजना पर निर्णय लिया जाएगा। अब देखना होगा कि सड़क हस्तांतरण को लेकर क्षेत्रीय जनता की मांग पर शासन स्तर से क्या कदम उठाए जाते हैं और प्रस्तावित आंदोलन को लेकर संघर्ष समिति आगे क्या रणनीति तय करती है




