उत्तराखण्डराज्य

नर्सिंग भर्ती में दोहरी नीति पर भड़के अभ्यर्थी, स्पष्ट नियमावली बनाकर छूटे हुए नर्सिंग युवाओं को न्याय देने की मांग

202वें दिन भी जारी रहा संघर्ष, सरकार से पूछा— आखिर कब तक युवाओं के भविष्य के साथ होगा खिलवाड़?

देहरादून/हल्द्वानी। नर्सिंग भर्ती को लेकर पिछले 202 दिनों से संघर्ष कर रहे बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। देहरादून में जारी धरने के साथ-साथ हल्द्वानी में भी आंदोलन तेज हो चुका है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की नीतियों में लगातार बदलाव और भर्ती प्रक्रिया में अपनाई जा रही दोहरी व्यवस्था के कारण हजारों नर्सिंग युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
नर्सिंग एकता मंच ने सरकार से मांग की है कि नर्सिंग भर्ती के लिए एक स्पष्ट, न्यायसंगत और स्थायी नियमावली बनाई जाए, जिससे उन सभी बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो सके जो वर्षों से भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि जब हजारों नर्सिंग अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, तब सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया को निरस्त कर भर्ती को वर्षवार प्रणाली से संपन्न करवाया। उस समय अभ्यर्थियों ने सरकार के निर्णय को स्वीकार किया और वर्षवार प्रक्रिया के अनुसार चयन की प्रतीक्षा की। लेकिन अब जब उन्हीं अभ्यर्थियों का चयन वर्षवार प्रक्रिया के तहत होने की संभावना बन रही है, तब सरकार पुनः परीक्षा आधारित भर्ती की ओर बढ़ रही है।
अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि आखिर भर्ती प्रक्रिया में यह दोहरी नीति क्यों अपनाई जा रही है? यदि पहले परीक्षा प्रणाली उचित नहीं थी और वर्षवार व्यवस्था लागू की गई थी, तो अब उसी वर्ग के अभ्यर्थियों को परीक्षा के माध्यम से बाहर करने का प्रयास क्यों किया जा रहा है? और यदि परीक्षा प्रणाली ही सही थी, तो पहले उसे निरस्त क्यों किया गया?
नर्सिंग एकता मंच का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में बार-बार बदलाव का सबसे बड़ा नुकसान उन युवाओं को हुआ है जिन्होंने सरकार की नीतियों पर भरोसा करते हुए वर्षों तक इंतजार किया। नियमों में लगातार परिवर्तन से हजारों योग्य और प्रशिक्षित नर्सिंग अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि उनकी मांग किसी विशेष वर्ग को लाभ पहुंचाने की नहीं, बल्कि उन अभ्यर्थियों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की है जो सरकार की बदलती नीतियों के कारण प्रभावित हुए हैं। इसलिए सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें पूर्व में लागू वर्षवार प्रणाली के आधार पर प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के हितों की भी रक्षा हो और किसी भी बेरोजगार नर्सिंग युवा के साथ अन्याय न हो।
मंच ने कहा कि प्रदेश के अस्पताल पहले से ही नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में हजारों प्रशिक्षित नर्सिंग अभ्यर्थियों को रोजगार से वंचित रखना न केवल युवाओं के साथ अन्याय है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी कमजोर करने वाला कदम है।
नर्सिंग एकता मंच की प्रमुख मांगें
नर्सिंग भर्ती के लिए स्पष्ट एवं स्थायी नियमावली बनाई जाए।
पूर्व में वर्षवार भर्ती के आधार पर प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जाए।
सरकार की बदलती नीतियों से प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय दिया जाए।
स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को लेकर बार-बार नियम बदलने की परंपरा समाप्त की जाए।
मंच का सरकार से सवाल
“जब अभ्यर्थी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे तब परीक्षा निरस्त कर वर्षवार भर्ती कराई गई, और आज जब उन्हीं अभ्यर्थियों का नंबर वर्षवार चयन में आ रहा है तो फिर परीक्षा की बात की जा रही है। आखिर भर्ती प्रक्रिया में यह दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है? सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि बेरोजगार नर्सिंग युवाओं के भविष्य के साथ यह असमंजस कब तक जारी रहेगा?”
मंच ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र स्पष्ट निर्णय लेकर न्यायपूर्ण समाधान नहीं निकाला, तो नर्सिंग समुदाय का आंदोलन पूरे प्रदेश में और अधिक व्यापक, उग्र एवं निर्णायक रूप धारण करेगा। हजारों नर्सिंग अभ्यर्थियों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने वाला ठोस निर्णय चाहते हैं।
आज धरना पे मौजूद रहे नवल पुंडीर, राजेंद्र कुकरेती, प्रवेश रावत,अनिल रमोला,मुकेश रमोला,भास्कर आदि

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