उत्तराखण्डराज्य

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

“काकोरी क्रांति गाथा” का शानदार मंचन

देख लेना जोश कितना बाज़ू -ए-कातिल में है..
गीत गाती निकलती आज़ादी के दीवानों की टोली ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, के अभिमंच पर
देहरादून । उस समय जोश भर दिया जब 15 मार्च 2026 की शाम को रविशंकर द्वारा लिखित और डॉ. प्रियंका शर्मा द्वारा निर्देशित नाटक “काकोरी क्रांति गाथा” का मंचन हो रहा था।
यह नाटक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना काकोरी प्रतिशोध शताब्दी समारोह के अंतर्गत सभ्यता अध्ययन केंद्र और साहित्य कला परिषद (दिल्ली सरकार) के संयुक्त आयोजन में किया गया था। 9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारी युवा राम प्रसाद बिस्मिल और उनके साथी अशफाकुल्ला खान, राजेन्द्र लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, मन्मथनाथ गुप्त, केशव चक्रवर्ती आज़ादी के दीवानों ने भारत को अंग्रेजी दासता से मुक्ति दिलाने की राह में आ रही आर्थिक मजबूरी से निबटने की एक योजना को पूरा किया।
सहारनपुर से लखनऊ जा रही जिस ट्रेन में सरकारी खजाना जा रहा था उस ट्रेन पर लखनऊ से पहले काकोरी रेलवे स्टेशन पर धावा बोल दिया। क्रांतिकारियों ने भारतीयों के शोषण से अर्जित उस खजाने को लूट लिया था।
इस घटना में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकुल्ला खान, राजेन्द्र लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, मन्मथनाथ गुप्त, केशव चक्रवर्ती, जैसे क्रांतिकारियों ने भाग लिया था। इस घटना का नाट्यरूपंतरण ही यह प्रस्तुति थी।
15 मार्च 2026 को सिल्ली सोर्स फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत नाटक काकोरी क्रांति गाथा इसी घटना की रंगमंचीय प्रस्तुति थी। काकोरी प्रतिशोध शताब्दी समारोह के अंतर्गत मंचित इस नाटक को देखने के लिए नाट्य प्रेमियों की भीड़ इस कदर बढ़ी कि सभागार खचाखच भरा हुआ था। इस आयोजन में विशिष्ट अतिथि थे- नरेश रावल, पूर्व गृहमंत्री गुजरात सरकार, वागीश पाठक, विधान पार्षद, उत्तर प्रदेश और आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर। स्वागताभिमुख थे- सभ्यता अध्ययन केंद्र के निदेशक, रवि शंकर। अतिथियों के परंपरागत सम्मान के बाद स्वागत भाषण में सभ्यता अध्ययन केंद्र के निदेशक रवि शंकर ने काकोरी प्रतिशोध शताब्दी समारोह के अंतर्गत “काकोरी क्रांति गाथा” नाटक की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।
सभ्यता अध्ययन केंद्र के संरक्षक पूर्व सांसद सत्यपाल सिंह ने इस अवसर पर कहा कि काकोरी प्रतिरोध की घटना औपनिवेशिक भारत की वह कहानी है जिसने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी थी। समारोह में आमंत्रित राष्ट्रीय सोच को प्रतिबद्ध स्वामी दीपांकर ने कहा कि नाटक का संदेश यही है कि हम एक रहें तो देश को कोई तोड़ने की सोच भी नही सकता। विशिष्ट अतिथि वागीश पाठक, (मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार) ने कहा- यह सशक्त प्रस्तुति बहुत संदेश देने में सफल रही।
नाटक का आलेख बहुत सशक्त था। क्रांतिकारी युवा दौर की जोशपूर्ण संवाद शैली दर्शकों को बार बार वाह, क्या बात है, कहने को प्रेरित करती रही। सधी स्क्रिप्ट, ओजपूर्ण संवाद, राम प्रसाद बिस्मिल के लिखे गीत और शेर सभागार में जब गूंज रहे थे दर्शकों की प्रतिक्रिया उसी के अनुरूप रही। संगीत ध्वनि प्रभाव उच्च कोटि का था। लाइट और साउंड सिस्टम बहुत अच्छा था। नाटक का निर्देशन किया था प्रियंका शर्मा ने। वास्तव में बिना कुशल निर्देशन के इतने बड़े परिदृश्य को मंच पर उतरना कठिन था। रेल में सरकारी खजाने को लूटने वाला दृश्य अनुभवी निदेशक के कौशल को व्यक्त कर रहा था।।
यह नाटक तो बहुत ही प्रभावशाली था। कलाकारों ने पात्र में डूबकर भावपूर्ण अभिनय किया। राम प्रसाद बिस्मिल का किरदार निभाने वाले कलाकार के कई संवादों पर का दर्शकों ने खूब तालियां बजाई। समारोह का संचालन प्रतिभावान युवा अविरल अभिलाष ने स्वभाव से हटकर जोशीले अंदाज में किया, जो आवश्यक भी था।
यह एक शानदार प्रस्तुति थी। इस नाटक को व्यापक रूप से पूरे देश में दिखाया जाना चाहिए।

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